उत्तराखंड

लाखों में बिक रहे ढिकाला के परमिट: ऑनलाइन बुकिंग पर उठे सवाल

रामनगर: विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के सबसे लोकप्रिय ‘ढिकाला ज़ोन’ की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। बुकिंग खिड़की खुलते ही महज दो मिनट के भीतर सभी कमरों का फुल हो जाना अब ‘परमिट माफिया’ और ऑटोमेटेड बॉट्स के इस्तेमाल की ओर इशारा कर रहा है। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि जो स्टे 30-33 हजार रुपये का है, उसे ब्लैक मार्केट में 3 से 4 लाख रुपये तक में बेचा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉर्बेट प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और बुकिंग सिस्टम संचालित करने वाली कंपनी से जवाब तलब किया है। ढिकाला ज़ोन कॉर्बेट पार्क का सबसे लोकप्रिय क्षेत्र है, जहां रात्रि विश्राम करना पर्यटकों का सपना होता है। सीमित गेस्ट हाउस और बढ़ती मांग के चलते हर सीजन में बुकिंग को लेकर मारामारी रहती है। नियम के अनुसार हर रविवार सुबह 10 बजे 45 दिन आगे की बुकिंग खुलती है, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि कुछ ही मिनटों में सभी कमरे बुक हो जाते हैं।
स्थानीय कारोबारी अमन खान का कहना है कि बुकिंग प्रक्रिया में कई चरण होते हैं—तारीख चयन, आईडी, ओटीपी और कैप्चा—ऐसे में दो मिनट में बुकिंग होना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें ऑटोमेटेड सिस्टम और अंदरखाने मिलीभगत हो सकती है।
कारोबारियों का दावा है कि जहां तीन दिन का स्टे 30-33 हजार रुपये का होता है, वहीं परमिट ब्लैक में 3 से 4 लाख रुपये तक बेचे जा रहे हैं।कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉर्बेट प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने जांच के आदेश दिए हैं और बुकिंग सिस्टम संचालित करने वाली कंपनी से जवाब मांगा गया है।

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