उत्तराखंड

भागीरथी ईको ज़ोन में सख्ती, हाई लेवल मीटिंग में निगरानी बढ़ाने का फैसला

देहरादून: उत्तराखंड के अति-संवेदनशील भागीरथी ईको सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में क्षेत्र के लिए एक मजबूत मॉनिटरिंग और प्रवर्तन तंत्र विकसित करने का बड़ा फैसला लिया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि उत्तरकाशी से गंगोत्री तक फैली इस घाटी में अब कोई भी गतिविधि केवल वैज्ञानिक अध्ययन और स्पष्ट दिशानिर्देशों के आधार पर ही होगी। सरकार का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाते हुए एक ऐसा संस्थागत ढांचा तैयार करना है, जो भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम कर सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि निगरानी तंत्र केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर नियमित निरीक्षण, डेटा आधारित मूल्यांकन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए इसे प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए एक स्पष्ट संस्थागत ढांचा तैयार करने की बात कही गई है, जिसमें केंद्र, राज्य और स्थानीय प्रशासन की भूमिका तय होगी।
बैठक में यह भी माना गया कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बेहद जरूरी है। इसलिए विकास योजनाओं को इस तरह तैयार किया जाएगा कि क्षेत्र की जैव विविधता सुरक्षित रहे और स्थानीय समुदायों को भी नुकसान न हो।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजबूत निगरानी तंत्र ही इस ईको सेंसिटिव ज़ोन की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने की कुंजी है। बेहतर समन्वय और सतर्क दृष्टिकोण से ही भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
भागीरथी ईको सेंसिटिव ज़ोन उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री से उत्तरकाशी तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र लगभग 100 किलोमीटर लंबी भागीरथी नदी घाटी को कवर करता है। इसे वर्ष 2012 में अधिसूचित किया गया था। इसमें गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के संवेदनशील वन क्षेत्र शामिल हैं। यहां बड़े बांध, खनन और भारी निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध है, ताकि गंगा के उद्गम क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जैव विविधता सुरक्षित रह सके।

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