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पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड में की हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना की चर्चा

देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान देवभूमि उत्तराखंड की विकास गाथा सात समंदर पार भी गूंज उठी। पीएम मोदी ने ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इसे आधुनिक भारत की विकास यात्रा और श्रद्धालुओं की सुविधा का एक बेहतरीन प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद विदेशों में—खासकर न्यूजीलैंड में बसे सिख समुदाय के बीच—इस परियोजना को लेकर भारी उत्साह और चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसने उत्तराखंड को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच स्थित श्री हेमकुंड साहिब करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं, लेकिन ऊंचाई, मौसम और चुनौतीपूर्ण मार्ग के कारण विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार रोपवे परियोजना पर तेजी से काम कर रही है, जिससे यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, सुगम और कम समय में पूरी हो सकेगी।

उत्तराखंड सरकार भी चारधाम और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों तक बेहतर संपर्क सुविधाएं विकसित करने के लिए सड़क, हेली सेवा और रोपवे जैसी परियोजनाओं पर लगातार काम कर रही है। ऐसे में हेमकुंड साहिब रोपवे का प्रधानमंत्री के संबोधन में उल्लेख और उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा, उत्तराखंड को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हेमकुंड साहिब रोपवे को उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और आधुनिक आधारभूत ढांचे के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

परियोजना पूरी होने के बाद न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यटन से जुड़े नए अवसर भी विकसित होंगे। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मोदी ने अपने संबोधन में साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान का स्मरण करते हुए सिख परंपरा के गौरवशाली इतिहास को नमन किया। उनके इस संदेश ने दुनिया भर में बसे सिख समुदाय को भावनात्मक रूप से जोड़ा।

न्यूजीलैंड सहित कई देशों के श्रद्धालु इस परियोजना को आस्था और आधुनिक विकास का अनूठा संगम मान रहे हैं। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किमी लंबी परियोजना पर करीब 2,730.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पीपीपी मॉडल में विकसित की जा रही इस परियोजना के पूरा होने से नौ घंटे का यह सफर मात्र 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

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