उत्तराखंड

रानीखेत के घने जंगल में 6 दिनों तक मौत से जंग, घास-पत्तियां खाकर जिंदा बची युवती

रानीखेत। उत्तराखंड के रानीखेत स्थित सुंदरखाल के बेहद घने और संवेदनशील जंगलों में रास्ता भटकी एक 28 वर्षीय युवती ने 6 दिनों तक मौत को मात देकर जिंदगी की जंग जीत ली। भूख-प्यास से तड़पती युवती ने घास और जंगली पत्तियां खाकर खुद को जीवित रखा। अंततः ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) ने एक संयुक्त और बेहद दुर्गम रेस्क्यू अभियान चलाकर युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मजखाली गांव निवासी विधि पुजारी पुत्री गिरीश तिवारी एक जुलाई को अपने पिता के साथ सुंदरखाल जंगल गई थी। इसी दौरान वह पिता से बिछड़ गई और घने जंगल में रास्ता भटक गई। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

तीन जुलाई को परिजनों ने उसके गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।जंगल में उसकी एक चप्पल मिलने के बाद परिजनों की चिंता और बढ़ गई। रानीखेत पुलिस और एसडीआरएफ पोस्ट सरियापानी की टीम ने संयुक्त खोज अभियान शुरू किया और उसे खोज निकाला। प्रारंभिक पूछताछ में युवती ने बताया कि पिता से बिछड़ने के बाद वह जंगल में रास्ता नहीं खोज सकी। छह दिनों तक उसे न भोजन मिला और न ही पीने का पानी। ऐसे में उसने घास और जंगली वनस्पतियां खाकर किसी तरह खुद को जीवित रखा।

बताया जा रहा है कि युवती की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है।सुंदरखाल का क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही के लिए संवेदनशील माना जाता है, जिससे परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती रही। हालांकि प्रारंभिक जांच में किसी जंगली जानवर के हमले के साक्ष्य नहीं मिले। बचाव टीम ने मौके पर युवती को प्राथमिक उपचार दिया और स्ट्रेचर के माध्यम से कई किलोमीटर तक दुर्गम जंगल पार कर सुरक्षित रोड हेड तक पहुंचाया। वहां से एम्बुलेंस के जरिए उसे राजकीय चिकित्सालय, रानीखेत भेजा गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरबंस सिंह ने टीम को शाबासी दी है। उपनिरीक्षक पंकज डंगवाल के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम लगातार जंगल में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। अभियान के दौरान टीम को सुंदरखाल से लगभग 12 से 13 किलोमीटर भीतर दुर्गम जंगल में युवती घायल अवस्था में मिली। इससे पहले चारा लेने गए कुछ ग्रामीणों ने दूर से युवती के चिल्लाने की आवाज सुनी थी, जिसके बाद बचाव दल को सही दिशा मिली।

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