उत्तराखंड

उत्तराखंड में वन भूमि पर अतिक्रमण की खैर नहीं, AI ऐप से होगी रियल-टाइम निगरानी

देहरादून। उत्तराखंड में वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने और अतिक्रमणकारियों पर नकेल कसने के लिए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। विभाग ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी ऐप विकसित किया है, जिसका जल्द ही राज्य के सभी वन प्रभागों में ट्रायल शुरू होगा।

इस नई डिजिटल प्रणाली के जरिए वन अतिक्रमण के मामलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी और विभिन्न अदालतों (सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक) में लंबित मामलों की प्रगति को एक ही प्लेटफॉर्म पर ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे विभागीय कार्रवाई में तेजी और पारदर्शिता आएगी। इस ऐप के माध्यम से उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण , मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट में लंबित वन अतिक्रमण संबंधी मामलों की डिजिटल ट्रैकिंग और विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे किसी भी प्रकरण की वर्तमान स्थिति, न्यायालयीन आदेश और विभागीय कार्रवाई की जानकारी तत्काल उपलब्ध हो सकेगी। मुख्य वन संरक्षक और अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि सभी प्रभागीय वन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने वन प्रभागों में अतिक्रमण से संबंधित आंकड़ों का सत्यापन करें। यदि कहीं कोई विसंगति हो तो उसे तुरंत ठीक करें।

साथ ही भारतीय वन अधिनियम के तहत प्राप्त न्यायिक शक्तियों का प्रभावी उपयोग करते हुए बेदखली से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। वन संरक्षकों को भी इस पूरी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है। नई तकनीक को लेकर फील्ड स्तर के अधिकारियों से भी सुझाव आमंत्रित किए गए, ताकि ऐप को व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि नई प्रणाली से विभिन्न वन प्रभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग संभव होगी और कार्रवाई की जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे वन भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के साथ-साथ भविष्य में नए अतिक्रमणों पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। मुख्य वन संरक्षक और अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि जीआईएस तकनीक पर आधारित इस एप का ट्रायल जल्द ही सभी वन प्रभागों में किया जाएगा। इसके लिए सभी प्रभागीय वनाधिकारियों को आदेश दे दिए गए हैं।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 में उत्तराखण्ड में 11,396.64 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में थी। इसके बाद जून 2024 से राज्य सरकार ने व्यापक “अतिक्रमण हटाओ अभियान” शुरू किया। इस अभियान के तहत 31 मार्च 2026 तक 1,560.31 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। विभाग का मानना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद अतिक्रमण से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई की गति में और तेजी आएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button