उत्तराखंड 2047: 28 लाख करोड़ की जीडीपी, 3.5% बेरोजगारी और हर परिवार को मिलेगी ‘देवभूमि आईडी’

Dehradun, 03 November, 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ दस्तावेज जारी करते हुए राज्य को वर्ष 2047 तक विकसित बनाने का बड़ा आर्थिक रोडमैप पेश किया है। इस योजना के तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मौजूदा 3.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर करीब 28 लाख करोड़ रुपये और प्रतिव्यक्ति आय 20 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। विजन डॉक्यूमेंट में केवल आर्थिक वृद्धि ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी दर को घटाकर 3.5% और बहुआयामी गरीबी को 0.61% तक लाकर आम नागरिक के जीवन स्तर में सुधार पर जोर दिया गया है। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस डाक्यूमेंट को जारी किया।
विजन दस्तावेज के अनुसार सरकार का जोर केवल अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना भी है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2047 तक प्रदेश की बेरोजगारी दर को घटाकर 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
बहुआयामी गरीबी का मतलब केवल कम आमदनी नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी है। यानी सरकार चाहती है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार, प्रशासन और जनता के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड विकसित राज्य बनेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
- 22 हजार मेगावट होगी ऊर्जा क्षमता: प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि विजन में कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कौशल विकास को प्रमुखता दी गई है। प्रदेश की स्थापित ऊर्जा क्षमता को वर्ष 2047 तक बढ़ाकर करीब 22 हजार मेगावाट करने और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
- अलग वर्ष के लिए तय किए भिन्न लक्ष्य: इस विकास योजना में वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके आधार पर विभागों को अपनी कार्ययोजनाएं बनानी होंगी। साथ ही समय-समय पर समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।
- परिवारों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, मिलेगी देवभूमि आईडी: देवभूमि परिवार पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक परिवार का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। पंजीकरण के बाद हर परिवार को विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी मिलेगी। इससे पात्र लोगों की पहचान कर सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना आसान होगा। नागरिकों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। योजनाओं की निगरानी और बजट नियोजन में भी मदद मिलेगी।


