उत्तराखंड

वेदर अपडेट: अब घर बैठे जानें अपने गांव का मौसम, IMD लाया ‘मेटियोगैन’

देहरादून। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल ‘मेटियोगैन’ विकसित किया है। यह तकनीक अब बड़े क्षेत्रों के बजाय सीधे आपके गांव, मोहल्ले या खेत के स्तर पर मौसम का हाल बताने में सक्षम होगी। इस स्मार्ट प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महज 300 मीटर के सूक्ष्म दायरे में बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की सटीक भविष्यवाणी कर सकती है।

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए, जहाँ चंद किलोमीटर की दूरी पर मौसम बदल जाता है, यह टूल वरदान साबित होगा। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार, मशीन लर्निंग और सैटेलाइट डेटा के समन्वय से तैयार यह टूल ‘मौसमग्राम’ और ‘मेघदूत’ जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए किसानों और आपदा प्रबंधन टीमों को ‘रियल टाइम’ अलर्ट प्रदान करेगा। यह सैटेलाइट, रडार और जमीन से मिलने वाले डेटा को एक साथ जोड़कर बेहद छोटे क्षेत्र करीब 300 मीटर के दायरे में यह बताती है कि किस इलाके में कब और कितनी बारिश होगी। इससे पहले मौसम की जानकारी बड़े क्षेत्रों के आधार पर मिलती थी, लेकिन अब गांव और खेत तक सटीक पूर्वानुमान संभव हो सकेगा।

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का व्यवहार बेहद अस्थिर रहता है। कई बार एक घाटी में तेज बारिश होती है, जबकि कुछ दूरी पर मौसम सामान्य रहता है। ऐसे में पारंपरिक पूर्वानुमान किसानों के लिए पूरी तरह उपयोगी नहीं हो पाते थे। ‘मेटियोगैन’ इस कमी को दूर करते हुए स्थानीय स्तर पर सटीक जानकारी देने में सक्षम है। राज्य के लगभग 8.5 लाख किसान इस तकनीक से सीधे लाभान्वित हो सकते हैं।

सटीक मौसम पूर्वानुमान मिलने से किसान बुवाई, सिंचाई, खाद डालने और फसल कटाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय सही समय पर ले सकेंगे। यदि भारी बारिश, ओलावृष्टि या खराब मौसम की चेतावनी पहले मिल जाए, तो वे अपनी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ आय में भी सुधार होगा और खेती अधिक सुरक्षित बन सकेगी। उत्तराखंड में पहले से चल रही ‘मौसमग्राम’ और ‘मेघदूत’ जैसी सेवाएं किसानों तक मौसम की जानकारी पहुंचा रही हैं, लेकिन ‘मेटियोगैन’ के जुड़ने से इन सेवाओं की सटीकता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

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