IIT रुड़की की स्टडी में खुलासा: देश के 10% से अधिक जिलों पर दोहरी प्राकृतिक आपदा का खतरा – IIT रुड़की का अध्ययन

Dehradun, 17 october 2026। जिस क्षेत्र में कल तक बाढ़ तबाही मचा रही हो, वहां कुछ ही समय बाद सूखे का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के शोधकर्ताओं के एक हालिया अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि देश के कई जिलों में बाढ़ और सूखा—दोनों ही आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता तेजी से बढ़ रही है। ‘npj Natural Hazards’ पत्रिका में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, वर्ष 2001 और 2011 के दौरान देश के 10 प्रतिशत से भी अधिक जिले ऐसे हैं, जो इस ‘दोहरे खतरे’ की चपेट में हैं। इससे इन क्षेत्रों के जल संसाधनों, बुनियादी ढांचे और आम लोगों की आजीविका पर भारी दबाव पड़ रहा है। शोधकर्ताओं ने सामाजिक, जनसांख्यिकीय और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़ों के आधार पर बाढ़ और सूखे के जोखिम को समझने के लिए मल्टी-हैजार्ड वल्नरेबिलिटी इंडेक्स (एमएचवीआई) तैयार किया।
अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2011 तक देश के पांच में से एक से अधिक जिले बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में थे, जबकि करीब पांच में से एक जिले में सूखे का खतरा अधिक था। वहीं, 10 फीसदी से अधिक जिले ऐसे पाए गए, जहां कई तरह के खतरों के प्रति संवेदनशीलता ज्यादा थी। शोध में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों में बाढ़ और सूखे की संवेदनशीलता बढ़ने के संकेत मिले। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के जिले दोनों खतरों के लिहाज से अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहे।
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रो. मोहित प्रकाश मोहंती के अनुसार, बाढ़ और सूखे को अक्सर अलग-अलग आपदाओं के रूप में देखा जाता है, जबकि इनका असर एक ही सामाजिक और भौतिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल राज्य स्तर के आंकड़ों से स्थानीय समस्याओं की सही तस्वीर सामने नहीं आती। इसलिए जिलेवार आकलन के आधार पर आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण, बुनियादी ढांचे और जलवायु अनुकूलन की योजनाएं तैयार करना जरूरी है। अध्ययन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने सहयोग दिया।



