उत्तराखंड

कुदरत का तांडव: थत्यूड़ में ओलावृष्टि से बागवानी और खेती को करोड़ों का नुकसान

थत्यूड़। जौनपुर ब्लॉक अंतर्गत थत्यूड़ क्षेत्र में शनिवार शाम आए कुदरती तूफान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अचानक बदले मौसम के मिजाज और भीषण ओलावृष्टि ने अपर पालीगाड़ क्षेत्र के दर्जनों गांवों में भारी तबाही मचाई है। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली राजमा, आलू, मटर और बींस जैसी नगदी फसलें पूरी तरह मटियामेट हो गई हैं, जबकि सेब, आड़ू और प्लम की फ्लावरिंग (फूल) झड़ने से बागवानी को भी गहरा जख्म लगा है। खेतों में ओलों की कई इंच मोटी परत देखकर काश्तकारों की आंखें नम हैं और उनके सामने अब आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों को स्थलीय निरीक्षण और नुकसान के आकलन के निर्देश दिए हैं।

क्षेत्र के प्रमुख काश्तकार रघुवीर नौटियाल ने बताया कि इस ओलावृष्टि ने राजमा, आलू, मटर, बींस और प्याज जैसी महत्वपूर्ण नगदी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। नगदी फसलों के साथ-साथ पकने को तैयार गेहूं और मसूर की पारंपरिक फसलें भी ओलों की मार से जमीन पर बिछ गई हैं। शनिवार रात टॉर्च की रोशनी में खेतों का मंजर देखने पहुंचे किसानों की आंखें नम थीं, क्योंकि खेतों में ओलों की कई इंच मोटी परत जमी हुई थी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी विनाशकारी ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी थी। वीरेंद्र नौटियाल, रत्नमणि गौड़ और जगत राणा सहित कई किसानों ने बताया कि अब उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और भविष्य की खेती के लिए पूंजी जुटाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कृषि के साथ-साथ इस ओलावृष्टि ने क्षेत्र की बागवानी को भी गहरे जख्म दिए हैं। वर्तमान में सेब, आड़ू, प्लम, चुल्लू और खुमानी के पेड़ों पर फ्लावरिंग यानी फूल आने का समय था। ओलों की भीषण मार के कारण पेड़ों से फूल पूरी तरह झड़ गए हैं, जिससे इस साल फलों के उत्पादन की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। खेड़ा, पापरा, भूयासारी, टिक्क, और मुंगलोडी जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बागवानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। फल पट्टी के रूप में विख्यात इन गांवों में अब केवल पेड़ों के ठूंठ और जमीन पर गिरे हुए फूल ही नजर आ रहे हैं, जिससे आगामी सीजन में सेब और आड़ू के उत्पादन पर भारी गिरावट आने की आशंका है।

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