उत्तराखंड

कुंभ 2027 की तैयारी: अखाड़ों में मंथन तेज, पेशवाई और धर्मध्वजा को भव्य बनाने की रणनीति

हरिद्वार। वर्ष 2027 में होने वाले महाकुंभ को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए हरिद्वार में हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार जहाँ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटी है, वहीं संत समाज और अखाड़ों ने भी अपने पारंपरिक अनुष्ठानों, पेशवाई, धर्मध्वजा और अमृत स्नान के लिए व्यापक स्तर पर मंथन शुरू कर दिया है। वर्ष 2021 में कोविड-19 की सीमाओं के कारण जो कसर रह गई थी, उसे 2027 में पूरी भव्यता के साथ पूरा करने का संकल्प लिया गया है।
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था के लिए एक स्वर्णिम अवसर बताया है। प्रशासन और अखाड़ों के बीच बढ़ते समन्वय से यह स्पष्ट है कि आगामी कुंभ न केवल अध्यात्म का केंद्र होगा, बल्कि यह क्षेत्र के विकास और वैश्विक पर्यटन को भी नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। कुंभ की तैयारियों को लेकर संत समाज और अखाड़ों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव रविन्द्र पुरी ने सरकार की पहल की सराहना करते हुए पुष्कर सिंह धामी और नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का विराट उत्सव है।
अखाड़ों ने पारंपरिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। धर्मध्वजा स्थापना, पेशवाई और अमृत स्नान (शाही स्नान) जैसे प्रमुख अनुष्ठानों को भव्य रूप देने की योजना बनाई जा रही है। पेशवाई के दौरान अखाड़ों की शाही सवारी, नगाड़ों की गूंज और साधु-संतों का अद्भुत वैभव कुंभ की पहचान होता है। स्नान पर्वों की तिथियां घोषित होते ही अखाड़ों ने संतों के ठहरने, भोजन, यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों की विस्तृत रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। महंत रविन्द्र पुरी ने कहा कि कुंभ के लिए किए जा रहे विकास कार्यों का लाभ लंबे समय तक हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा। इससे तीर्थाटन के साथ-साथ पर्यटन, होटल व्यवसाय, परिवहन और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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