उत्तराखंड में ‘जनगणना 2027’ का आगाज; पूछे जाएंगे 33 सवाल

“अब सिर्फ आबादी नहीं गिनी जाएगी, बल्कि आपकी तरक्की के हर पायदान का हिसाब होगा।”
देहरादून। उत्तराखंड के घरों की बनावट और लोगों की डाइट में आए बदलावों का सटीक डेटा तैयार करने के लिए जनगणना-2027 की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। 24 मई तक चलने वाले इस पहले चरण में मकानों की संरचना और परिवार की जीवनशैली पर केंद्रित 33 सवालों के जवाब ऑनलाइन दर्ज किए जाएंगे। इसमें पहली बार पारंपरिक अनाज (मोटे अनाज) के उपभोग और घर के फर्श की सामग्री (मिट्टी या टाइल्स) जैसे बिंदुओं पर विशेष फोकस रखा गया है। सरकार इस विस्तृत जानकारी के जरिए यह समझने की कोशिश कर रही है कि विकास की किरणें धरातल पर कितनी पहुंची हैं और किन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।
उत्तराखंड में आज से मकानों की गणना से जनगणना-2027 की शुरुआत हो रही है। एक माह तक चलने वाली यह प्रक्रिया आनलाइन है। इस बार जनगणना में मकानों की संरचना को लेकर विशेष फोकस रखा गया है। इसमें पूछा जाएगा कि घर का फर्श किस सामग्री से बना है, मिट्टी, पत्थर, सीमेंट या टाइल्स। इसके साथ ही दीवारों और छत की बनावट की भी जानकारी दर्ज की जाएगी। इन सवालों के माध्यम से यह समझने की कोशिश होगी कि देश में कितने घर कच्चे हैं और कितने पक्के, तथा किन क्षेत्रों में बेहतर आवास सुविधाओं की आवश्यकता है।
ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में आज भी पारंपरिक निर्माण सामग्री का व्यापक उपयोग होता है। उत्तराखंड जैसे राज्यों में पत्थर, लकड़ी और मिट्टी से बने मकान सामान्य हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त माने जाते हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट, टाइल्स और आधुनिक तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। यह अंतर नीति निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करेगा।
जनगणना 2027 केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह देश के बदलते सामाजिक, आर्थिक और जीवनशैली के स्वरूप को समझने का एक व्यापक प्रयास है, जो नीतियों को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



