उत्तराखंड

आदि कैलाश में गूंजे ‘जय महाकाल’ के जयकारे: नशामुक्त भारत के संदेश के साथ पूरी हुई अल्ट्रा मैराथन 2.0

Dehradun, 25 October, 2026। समुद्र तल से लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई, माइनस सात डिग्री सेल्सियस का जमा देने वाला तापमान और हवा में कम ऑक्सीजन जैसी अत्यंत विषम परिस्थितियों के बावजूद धावकों के बुलंद हौसले कम नहीं हुए। आदि कैलाश की पावन भूमि ज्योलिंगकांग में शनिवार को आयोजित ‘अल्ट्रा मैराथन 2.0’ में देश के 13 राज्यों से आए 1200 धावकों ने अपने साहस, धैर्य और शारीरिक क्षमता का अद्भुत परिचय दिया। ‘जय महाकाल’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ शुरू हुई इस मैराथन का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को नशामुक्त और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना रहा। सुबह साढ़े पांच बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कड़ाके की ठंड के बीच धावक दौड़ के लिए तैयार नजर आए।

सुबह 6:30 बजे सभी प्रतिभागियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। इसके बाद सुबह 6:40 बजे मुख्य अतिथि सीडीओ डॉ. दीपक सैनी और आईटीबीपी के अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर मैराथन रवाना की। दौड़ शुरू होते ही पूरा क्षेत्र भारत माता की जय और जय महाकाल के नारों से गूंज उठा। ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में कम तापमान और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां धावकों के सामने बड़ी चुनौती रहीं। ऐसे वातावरण में दौड़ना सामान्य मैराथन की तुलना में अधिक कठिन होता है।

कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड के कारण शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके बावजूद प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ आयोजन में भाग लिया। मैराथन में गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश निवासी 65 वर्षीय महिपाल सिंह सबसे अधिक उम्र के धावक रहे। उनकी भागीदारी ने उम्र की सीमाओं से आगे बढ़कर फिटनेस और दृढ़ इच्छाशक्ति का संदेश दिया। मौसम और ऊंचाई से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए आयोजन में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। आईटीबीपी, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात रहीं। धावकों की सहायता के लिए विभिन्न स्थानों पर मेडिकल कैंप लगाए गए और गर्म पानी की व्यवस्था की गई। कठिन परिस्थितियों में प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आयोजन की अहम प्राथमिकता रही।

आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन का उद्देश्य सीमांत क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को फिटनेस और नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूक करना है। प्रतिभागियों ने नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से ‘नशे को ना, जिंदगी को हां’ और ‘से नो टू ड्रग्स’ का संदेश दिया गया। हिमालय की कठिन परिस्थितियों के बीच आयोजित इस मैराथन ने साहस, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देशभर तक पहुंचाने का प्रयास किया।

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