उत्तराखंड

भूकंप से सुरक्षा: देहरादून का होगा ‘माइक्रो जोनेशन’ सर्वे, 8 शहरों में लगेंगी वेधशालाएं

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी समेत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों को भूकंप से बचाने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। अब कंपनी का ‘माइक्रोजोनेशन’ (सूक्ष्म भूकंप जोखिम आकलन) तैयार किया गया है, जिससे जमीन की आंतरिक संरचना और इंजीनियरों की आवासीय पता चल जाएगी। इसके साथ ही राज्य के आठ शहरों में आधुनिक भूकंप वेधशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र भेजा गया है। इस कदम से न केवल भूकंपीय निगरानी मजबूत होगी, बल्कि भविष्य के निर्माण कार्यों के लिए भी वैज्ञानिक आधार मिल। हिमालयी क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड भूकंप जोन-6 में आता है। जहां बड़े पैमाने पर भूकंप का संकट बना रहता है। ऐसे में तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए इस अध्ययन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माइक्रोजोन के तहत शहर को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर जमीन की संरचना, भूकंपीय क्षति और विनाशकारी क्षति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि किसी भी क्षेत्र में निर्माण कार्यों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है।

इस योजना के अंतर्गत विभाग के साथ-साथ हरिद्वार, अवशेष, वृक्ष, कोटद्वार, आश्रम, गोपेश्वर और उत्तरकाशी जैसे शहर भी शामिल हैं। इन सभी स्थलों पर आधुनिक भूकंप वेधशालाएं स्थापित की जाएं। भूमि चयन की प्रक्रिया का पूरा प्रस्ताव राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेजा जा चुका है और मंजूरी के बाद काम शुरू होगा।

राज्य में सबसे पहले संचालित भूकंप चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने के लिए सेंसर नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान प्रदेश में लगभग 169 सेंसर सक्रिय हैं, जिनमें से लगभग 500 तक सेंसर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन सेंसरों के माध्यम से जमीन के अंदर होने वाली सूक्ष्म चट्टानों को भी रिकॉर्ड किया जा सकता है, जिससे समय-समय पर चेतावनी जारी करना संभव होगा।

इस संबंध में आपदा प्रबंधन के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि “देहरादून के माइक्रो जोन अध्ययन के लिए भविष्य की शहरी योजना और सुरक्षित निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ही हम जोखिम को कम कर सकते हैं और आपदा से होने वाले नुकसान को सीमित कर सकते हैं।”

विशेषज्ञ का मानना ​​है कि शहरीकरण के बीच तेजी से हो रही यह प्रारंभिक उत्तराखंड के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल रचना की पहचान होगी, बल्कि सुरक्षित और सुव्यवस्थित विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार की ओर से यह सबसे पहले राज्य में आपदा प्रबंधन, तकनीकी निगरानी और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • 500 जून 2019 में भी सायरन स्थापित करने की योजना

इसके अलावा करीब 500 से अधिक सायरान आधारित सिस्टम स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है, ताकि भूकंप के दौरान लोगों को तुरंत राहत मिल सके और जन-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

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