उत्तराखंड

उपचार के दौरान गर्भवती महिला की मौत, 18 घंटे तक पोस्टमार्टम न होने पर अस्पताल में बवाल

बागेश्वर। उत्तराखंड के कपकोट (तिरवाण गांव) की रहने वाली एक गर्भवती महिला की जिला अस्पताल में मौत के बाद गुरुवार को जमकर बवाल हुआ। गर्भ नली में भ्रूण फंसने के कारण गंभीर हालत में अस्पताल लाई गई महिला ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद, करीब 18 घंटे तक पोस्टमार्टम की कार्रवाई न होने से भड़के परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बाहर धरना देकर मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

जानकारी के अनुसार कपकोट के तिरवाण गांव निवासी 27 वर्षीय तनुजा देवी, पत्नी मोहन चंद्र, गर्भवती थीं। बताया जा रहा है कि उनकी गर्भावस्था दो से तीन माह की थी। बुधवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें तेज पेट दर्द की शिकायत हुई। परिजन उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गर्भ नली में भ्रूण फंस जाने के कारण उनकी स्थिति गंभीर हुई। बताया जा रहा है कि इससे पहले उनका कोई अल्ट्रासाउंड या विस्तृत चिकित्सीय परीक्षण नहीं हुआ था।

महिला की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मृतका अपने पीछे एक छोटे बेटे को छोड़ गई हैं। परिजनों का आरोप है कि बुधवार शाम करीब छह बजे मौत होने के बावजूद गुरुवार दोपहर तक पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। इसको लेकर स्वजन और ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। ग्रामीणों ने कहा कि वे कई बार जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से गुहार लगाने पहुंचे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आक्रोशित ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बाहर धरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते मुख्य सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी नहीं होती और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस और तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। कोतवाल अनिल उपाध्याय और सीएमएस डॉ. तपन शर्मा ने लोगों को समझाने का प्रयास किया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

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