सीमांत ऊखीमठ के तोषी जूनियर हाई स्कूल में शिक्षक नहीं, छह बच्चों का भविष्य अधर में

ऊखीमठ। उत्तराखंड सरकार और शिक्षा विभाग के सीमांत क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। विकासखंड ऊखीमठ का सीमांत राजकीय जूनियर हाई स्कूल, तोषी पिछले कुछ समय से पूरी तरह शिक्षक विहीन है, जिससे यहाँ पढ़ने वाले छह मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
विभाग ने आनन-फानन में व्यवस्था संभालने के लिए पास के ही प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक को इसका अतिरिक्त प्रभार तो सौंप दिया, लेकिन इस दोहरी जिम्मेदारी के कारण दोनों स्कूलों की पढ़ाई चौपट हो रही है। इस बदहाली से नाराज ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल में स्थायी शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई, तो वे जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन की शुरुआत करेंगे। विद्यालय में किसी नियमित शिक्षक की तैनाती न होने के कारण शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में व्यवस्था बनाने के लिए गांव के ही प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक को जूनियर हाई स्कूल का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
इस दोहरी जिम्मेदारी के कारण एक ही शिक्षक को दोनों विद्यालयों को संभालना पड़ रहा है, जिससे दोनों ही स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। छात्रों को नियमित कक्षाएं नहीं मिल पा रही हैं और न ही समय पर पाठ्यक्रम पूरा हो पा रहा है।
शिक्षक विहीन स्कूल को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीण गीता राम सेमवाल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही विद्यालय में मात्र छह छात्र हैं, लेकिन उनके भविष्य का महत्व किसी बड़े स्कूल के बच्चों से कम नहीं है। शिक्षक न होने से बच्चों का आधार कमजोर हो रहा है, जिससे वे भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ जाएंगे।
तोषी के ग्रामीणों और अभिभावकों ने सरकार से अंतिम गांवों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई, तो वे शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


