मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से रोशन हो रहीं उम्मीदें, 210 मेगावाट क्षमता स्थापित; 3,500 से अधिक को मिला रोजगार

Dehradun, 11 August, 2026। उत्तराखंड में हरित ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना’ के तहत अब तक 1,132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 210 मेगावाट पहुँच गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 3,500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जिससे ग्रामीण व पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना के तहत राज्य में 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य दिया है।
योजना के तहत स्थानीय निवासी 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर रहे हैं। लाभार्थियों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत विभिन्न सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि योजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है। स्थानीय स्तर पर परियोजनाओं के संचालन से युवाओं को अपने क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे पलायन रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी
जिलेवार आंकड़ों में टिहरी गढ़वाल ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। यहां 369 सौर संयंत्रों से 69,050 किलोवाट क्षमता विकसित की गई है। उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हो चुकी है। हरिद्वार में 86 संयंत्रों से 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 से 15,440 किलोवाट और चमोली में 72 संयंत्रों से 11,725 किलोवाट क्षमता विकसित हुई है। अल्मोड़ा में भी 32 संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।



