उत्तराखंडस्वास्थ्य

शरीर की हलचल से चलेगा यह ‘स्मार्ट बैंडेज’, 15 दिनों में भरेगा घाव

Roorkee, 13 September, 2026। आईआईटी रुड़की और इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा अनोखा ‘स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज’ तैयार किया है, जो बिना किसी बाहरी बैटरी या तार के घाव को तेजी से भरने में मदद करेगा। यह बैंडेज शरीर की प्राकृतिक गतिविधियों और खिंचाव से ऊर्जा प्राप्त कर स्वयं विद्युत संकेत पैदा करता है। पशुओं पर किए गए परीक्षणों में इस बैंडेज ने 13 से 15 दिनों के भीतर घाव को 90 से 95 प्रतिशत तक भरने में सफलता हासिल की है। यह महत्वपूर्ण शोध प्रतिष्ठित जर्नल ‘नैनो एनर्जी’ में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को 3डी मोनोलिथिक इंटीग्रेटेड डाइपोलर-आयोनिक फाइब्रस आर्किटेक्चरल स्कैफोल्ड नाम दिया है। शरीर के हिलने-डुलने या किसी हिस्से के खिंचने पर इसकी लचीली संरचना यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत संकेतों में बदलती है। यह अपनी मूल लंबाई के करीब 800 प्रतिशत तक खिंच सकता है। प्रयोगशाला परीक्षण में इससे नियंत्रण की तुलना में करीब तीन गुना अधिक कोशिका प्रसार और 2.5 गुना अधिक कोशिका प्रवासन दर्ज किया गया।

पशु परीक्षण में 13 से 15 दिनों में करीब 90 से 95 प्रतिशत तक घाव बंद होने की स्थिति देखी गई। नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण और कोलेजन जमाव में भी वृद्धि दर्ज की गई। चलते-फिरते चूहों पर परीक्षण के दौरान बैंडेज ने उनकी प्राकृतिक गतिविधियों से लगातार विद्युत संकेत उत्पन्न किए। 500 बार खिंचाव के परीक्षण और तीन महीने के लंबे परीक्षण में भी इसका प्रदर्शन स्थिर रहा। यह शोध नैनो एनर्जी शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का प्रयोगशाला के साथ पशु मॉडल पर भी परीक्षण किया। अध्ययन के अनुसार बैंडेज से उपचारित घावों में 13 से 15 दिनों के भीतर करीब 90 से 95 प्रतिशत तक घाव बंद होने की स्थिति देखी गई। उपचारित घावों में नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण और कोलेजन जमाव में भी वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि तकनीक अभी मानव उपचार के लिए प्रमाणित नहीं है। नियमित चिकित्सा उपयोग से पहले मानव पर नैदानिक परीक्षण और आवश्यक चिकित्सा सत्यापन जरूरी होगा।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वयं ऊर्जा पैदा करना है। सामान्य विद्युत आधारित घाव उपचार प्रणालियों में बैटरी या बाहरी ऊर्जा स्रोत की जरूरत होती है, जबकि इस बैंडेज में शरीर की गतिविधियां ही ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। चलने, हिलने या शरीर के किसी हिस्से के खिंचने पर बैंडेज की लचीली संरचना में बदलाव होता है और उससे विद्युत संकेत पैदा होते हैं। इससे भविष्य में आसानी से इस्तेमाल होने वाली और बाहरी ऊर्जा पर कम निर्भर घाव देखभाल प्रणालियां विकसित करने की संभावना बढ़ती है।

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