उत्तराखंड के हर स्कूल का होगा अपना आपदा प्रबंधन प्लान: भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए यूएसडीएमए और शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल

Dehradun, 12 September, 2026। उत्तराखंड के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में आपदा से सुरक्षा के लिए अब स्कूल-विशिष्ट आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग और शिक्षा विभाग की बैठक में तय की गई रणनीति के तहत प्रत्येक स्कूल की भौगोलिक स्थिति और वहां के संभावित खतरों—जैसे भूकंप, भूस्खलन और बाढ़—को देखते हुए सुरक्षित निकासी, मॉक ड्रिल और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाएगी।
इस पहल के तहत शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की जिम्मेदारियां तय करने के साथ-साथ दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष निकासी योजना और त्वरित संचार तंत्र विकसित किया जाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक के निर्देशों के तहत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लिए शिक्षा विभाग और यूएसडीएमए की संयुक्त समिति गठित की जाएगी। प्लान में प्रत्येक स्कूल के आसपास भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमपात, हिमस्खलन और आग जैसे संभावित खतरों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर हर कक्षा और भवन के लिए निकासी मार्ग तय होगा। परिसर में सुरक्षित एकत्रीकरण स्थल भी चिह्नित किया जाएगा।
आपदा के समय किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी पहले से तय रहेगा। प्रधानाचार्य, शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के साथ जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों की भूमिकाएं भी निर्धारित की जाएंगी। चेतावनी देने, बच्चों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार और राहत-बचाव के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी। स्कूलों में पुलिस, फायर, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे। फर्स्ट एड किट और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध रहेगी।
समय-समय पर मॉक ड्रिल कर यह जांचा जाएगा कि आपदा आने पर स्कूल की तैयारियां वास्तव में कितनी प्रभावी हैं। दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की सुरक्षित निकासी के लिए अलग व्यवस्था होगी। भवन, बिजली, गैस, रसोई, प्रयोगशाला और पानी की टंकियों की सुरक्षा भी जांची जाएगी। अभिभावकों से संपर्क के लिए प्रभावी संचार व्यवस्था विकसित करने के साथ स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायत और समुदाय को भी इस पूरी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।



