उत्तराखंड में बलिदानी सैनिकों के आश्रितों को अब 50 लाख अनुग्रह राशि, सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में: CM धामी

Haldwani, 11 September, 2026। हल्द्वानी में आयोजित गौरव सेनानी मिलन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सैनिक के लिए ‘पूर्व’ या ‘भूतपूर्व’ जैसे शब्द केवल औपचारिकता हैं, क्योंकि सेना की वर्दी उतरने के बाद भी देशभक्ति और अनुशासन की भावना जीवनभर कायम रहती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सैनिकों व उनके परिवारों के कल्याण के लिए कई बड़े ऐलाानों की घोषणा की, जिसमें बलिदानी सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करना, परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की राशि 2 करोड़ रुपये करना और अचल संपत्ति की खरीद पर स्टांप शुल्क में 25% छूट देना शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि देहरादून के गुनियाल गांव में भव्य ‘सैन्य धाम’ का निर्माण अब अंतिम चरण में है। कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, भाजपा के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, कर्नल अजय कोठियाल, राम सिंह कैड़ा, सूबेदार मेजर बहादुर सिंह मेहरा, कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी, कैप्टन गंभीर सिंह धामी, शमशेर सिंह बिष्ट सहित अन्य नेतागण व पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने बलिदानी सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को दी जाने वाली राशि भी 50 लाख से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की गई है। बलिदानी सैनिक के परिवार के एक सदस्य को राज्य सेवा में समायोजित करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। इसके लिए आवेदन की समयसीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सेवारत और पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति खरीदने पर स्टांप शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वरोजगार शुरू करने वाले पूर्व सैनिकों को विशेष सहायता देने के साथ सैन्य परिवारों के भूमि संबंधी मामलों के शीघ्र निस्तारण और शस्त्र लाइसेंस से जुड़े लंबित प्रकरणों के समाधान के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
धामी ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। यह स्मारक उत्तराखंड के वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले केवल योजनाएं नहीं, बल्कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति हैं।



