उत्तराखंड

वेली ब्रिज बहा, चीन सीमा का संपर्क कटा

Dharchula, 13 September, 2026। चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में आपदा ने एक बार फिर आवागमन की अहम कड़ी को तोड़ दिया है। कुलागाड़ नाले में बीती रात आए अचानक और तेज सैलाब में महज़ एक सप्ताह पहले बीआरओ द्वारा तैयार किया गया नया वेली ब्रिज बह गया। इस पुल के बहने से लिपुलेख, तवाघाट, दारमा और चौदांस समेत कई सीमांत क्षेत्रों का धारचूला से संपर्क पूरी तरह कट गया है। वर्ष 2013 से अब तक इस नाले में बहने वाला यह छठा पुल है। 15 सितंबर से शुरू होने वाली आदि कैलाश यात्रा के दूसरे चरण से ठीक पहले हुए इस हादसे ने प्रशासन और बीआरओ की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार रात करीब 10 बजे कुलागाड़ नाले में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया। नाले में तेज गड़गड़ाहट और बड़े-बड़े बोल्डरों के बहने की आवाज सुनकर आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। कुछ ही देर में तेज बहाव ने नए वेली ब्रिज को अपनी चपेट में ले लिया।

ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में पुल पूरी तरह गायब दिखाई दे रहा है। बताया गया कि पुल के साथ पुराने पुल का मलबा भी पानी बहा ले गया। लोहे के गार्डरों के टुकड़े तक मौके पर नजर नहीं आ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पांच सितंबर को ही बीआरओ ने अथक प्रयासों के बाद नया वेली ब्रिज तैयार किया था। महज एक सप्ताह के भीतर पुल का दोबारा बह जाना सीमांत क्षेत्र के सड़क संपर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय ग्रामीण धर्म सिंह धामी, जोगा सिंह, महेश वर्मा, पवन सिंह धामी और नन्दन सिंह धामी के अनुसार वर्ष 2013 से अब तक कुलागाड़ में पांच पुल आपदा की भेंट चढ़ चुके हैं। नया पुल छठा पुल है, जो तेज बहाव में बह गया।

ग्रामीणों के बीच ‘कुलागाड़ बूबू’ देवता को लेकर स्थानीय धार्मिक मान्यता भी चर्चा में है। हालांकि पुलों के बार-बार बहने के वास्तविक कारणों के लिए तकनीकी जांच जरूरी है। 15 सितंबर से आदि कैलाश यात्रा का दूसरा चरण प्रस्तावित है। ऐसे में पुल टूटने से प्रशासन और बीआरओ की चुनौती बढ़ गई है। एसडीएम धारचूला ने रात करीब 11 बजे बीआरओ और एसएचजी से पुष्टि के बाद पुल बहने की जानकारी दी। राजस्व विभाग की टीम को जांच के लिए मौके पर रवाना किया गया है। कुलागाड़ क्षेत्र में पुलों के बार-बार बहने का सिलसिला नया नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों धर्म सिंह धामी,जोगा सिह,महेश वर्मा,पवन सिंह धामी,नन्दन सिंह धामी के अनुसार वर्ष 2013 से अब तक इस क्षेत्र में लगातार पुल आपदा की भेंट चढ़ते रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अब तक पांच पुल बह चुके हैं और यह नया वेली ब्रिज छठा पुल है, जो नाले के तेज बहाव में बह गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button