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उत्तराखंड की ‘वीएल मंडुआ 400’ किस्म ने कर्नाटक में मारी बाजी, सूखे में भी बंपर पैदावार से खिले किसानों के चेहरे

Almora, 18 October, 2026। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा द्वारा विकसित मंडुआ की उन्नत किस्म ‘वीएल मंडुआ 400’ अब कर्नाटक के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम समय में पकने, सूखे को सहन करने, अधिक कैल्शियम और पारंपरिक किस्मों से 11.5% अधिक उपज देने की खासियतों के चलते यह किस्म खेती और पोषण दोनों लिहाज से किसानों का भरोसा जीत रही है। राष्ट्रीय बीज निगम, दावणगेरे के अनुसार, इस खरीफ सीजन में कर्नाटक में करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में इस किस्म का बीज उत्पादन किया गया।

इसमें किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े 92 लघु एवं सीमांत किसानों ने भागीदारी की। इस दौरान सामान्य बिक्री के माध्यम से करीब 500 क्विंटल और डीलरों के जरिए 150 क्विंटल बीज बेचा गया। कम बारिश के बावजूद किसानों ने फसल के प्रदर्शन पर संतोष जताया है। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के अनुसार, कम समय में पकने, अच्छी उपज और अधिक कैल्शियम जैसी विशेषताओं के कारण यह किस्म किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। किसानों को इसके गुणों और खेतों में प्रदर्शन की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ने कर्नाटक के विजयनगर जिले के उज्जैनी गांव में किसान क्षेत्र दिवस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।

वीएल मंडुआ 400 की प्रमुख विशेषता इसका कम समय में तैयार होना है। यह किस्म 100 दिन से भी कम अवधि में पक जाती है। इसकी बालियां सघन होती हैं और उपज क्षमता भी अच्छी है। वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए यह किस्म खास उपयोगी हो सकती है। कम अवधि में फसल तैयार होने से मौसम के अंतिम चरण में सूखा पड़ने की स्थिति में नुकसान का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। इससे कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को फसल का विकल्प उपलब्ध होता है।

अखिल भारतीय समन्वित लघु धान्य अनुसंधान परियोजना के तहत देश के 40 स्थानों पर किए गए परीक्षणों में इस किस्म की औसत उपज 34.77 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। इसके मुकाबले मानक किस्म वीएल मंडुआ 376 की औसत उपज 31.11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। इस तरह वीएल मंडुआ 400 ने मानक किस्म से 11.5 प्रतिशत अधिक औसत उपज दी। परीक्षणों के ये परिणाम इसकी उत्पादन क्षमता को रेखांकित करते हैं।

यह किस्म पोषण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसके 100 ग्राम दाने में 399.5 मिलीग्राम कैल्शियम पाया गया है। ऐसे में मंडुआ की यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने के साथ पोषण सुरक्षा मजबूत करने में भी उपयोगी हो सकती है।

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