कोरोना का नया ‘सिकाडा’ वैरिएंट, 23 देशों में फैला संक्रमण, भारत में भी हाई अलर्ट

नई दिल्ली। दुनियाभर में पैर पसार रहे कोविड-19 के नए और घातक वैरिएंट ‘सिकाडा’ (BA.3.2) ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। ओमिक्रॉन परिवार का यह नया रूप अपने असामान्य म्यूटेशन और स्पाइक प्रोटीन में हुए बदलावों के कारण पहले के मुकाबले कहीं अधिक संक्रामक माना जा रहा है। अब तक अमेरिका सहित 23 देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका यह वैरिएंट ‘अंडर द रडार’ फैलने की क्षमता रखता है। हालांकि भारत में अभी तक इसका कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और वायरस के बदलते स्वरूप को देखते हुए विशेषज्ञों ने कड़ी सतर्कता बरतने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों ने वेस्टवॉटर मॉनिटरिंग के जरिए इस अदृश्य खतरे की पहचान की है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए नई चुनौती बन सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार BA.3.2, ओमिक्रॉन परिवार का ही एक नया रूप है, लेकिन इसमें असामान्य रूप से ज्यादा बदलाव देखे गए हैं। खासतौर पर इसके स्पाइक प्रोटीन में कई म्यूटेशन इसे अधिक खतरनाक बना सकते हैं। यही प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यह नया वैरिएंट धीरे-धीरे दुनिया के कई हिस्सों में फैल चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 देशों में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है। अमेरिका में इसका असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। जहां कई राज्यों में इसके संकेत मिले हैं। विशेषज्ञ इसे “अंडर द रडार” फैलने वाला संक्रमण मान रहे हैं, जो चुपचाप लोगों को संक्रमित कर सकता है।
इस वैरिएंट की पहचान के लिए वैज्ञानिकों ने सीवेज यानी गंदे पानी की जांच का सहारा लिया। इस तकनीक से संक्रमण के फैलाव का अंदाजा पहले ही लगाया जा सकता है। कई जगहों पर मरीजों की संख्या बढ़ने से पहले ही पानी के नमूनों में वायरस के अंश मिल गए, जिससे इसकी मौजूदगी का संकेत मिला। भारत में अभी तक इस वैरिएंट का व्यापक असर नहीं दिखा है, लेकिन विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के चलते इसके आने की संभावना बनी हुई है। देश में अन्य वैरिएंट्स के कुछ मामले सामने आए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि वायरस लगातार अपना रूप बदल रहा है।



