उत्तराखंड

उत्तराखंड में फायर लाइनों को पुनर्जीवित करने के लिए 15 हजार पेड़ों के कटान की तैयारी

 

देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों को भीषण आग से बचाने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद, विभाग राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों में पुरानी और बंद पड़ी फायर लाइनों को सक्रिय करने जा रहा है। इसके लिए कुमाऊं, गढ़वाल और वन्यजीव प्रभागों में कुल 134 लाट चिन्हित किए गए हैं, जहाँ करीब 15 हजार पेड़ों का कटान किया जाएगा। इस योजना के तहत विशेष रूप से नैनीताल, रामनगर, चंपावत और देहरादून जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में फायर लाइनों से झाड़ियाँ और अवरोध हटाए जाएंगे। राज्य में अब तक 236 से अधिक वनाग्नि की घटनाओं और 176 हेक्टेयर वन क्षेत्र के प्रभावित होने के बाद विभाग ने 1689 वन बीटों को संवेदनशीलता के आधार पर वर्गीकृत कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम तेज कर दिए हैं।

विभाग के मुताबिक कुल 134 लाटों में से 93 कुमाऊं क्षेत्र में चिन्हित किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से नैनीताल, रामनगर और चंपावत वन क्षेत्रों के जंगल शामिल हैं। वहीं 37 लाट गढ़वाल मंडल में स्थित हैं, जिनमें देहरादून और कालसी क्षेत्र प्रमुख हैं। इसके अलावा चार लाट वन्यजीव क्षेत्रों में हैं, जिनमें केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के जंगल शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में फायर लाइन को दोबारा सक्रिय करने के लिए पेड़ों का चिन्हीकरण और कटान किया जाएगा। वनाग्नि नियंत्रण के राज्य नोडल अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक के अनुसार फायर लाइनों को दुरुस्त करने के मद्देनजर सभी वन प्रभागों से ब्योरा जुटाया जा रहा है।

वन विभाग के अनुसार यह अभियान राज्य के छह प्रमुख वन प्रभागों में चलाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में फायर लाइन बहाली का काम होना है, उनमें देहरादून, चंपावत, नैनीताल, रामनगर, केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग और कालसी मृदा संरक्षण प्रभाग शामिल हैं। इन इलाकों के जंगलों में वर्षों पुरानी फायर लाइनें अब पेड़ों, झाड़ियों और सूखी वनस्पतियों से भर चुकी हैं। वन विभाग के अनुसार फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन में अब तक करीब 176 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से प्रभावित हो चुका है, जबकि 236 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। विभाग ने राज्य की 1689 वन बीटों को आग के लिहाज से संवेदनशील माना है। इनमें 84 बीट अत्यधिक संवेदनशील, 291 मध्यम संवेदनशील और 1364 कम संवेदनशील श्रेणी में रखी गई हैं। वन विभाग के अनुसार राज्य में इस बार भी वनाग्नि का खतरा बना हुआ है।

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