उत्तराखंड

जंगलों के साथ जीना सिखाएगा वन विभाग, संघर्ष कम करने को नई रणनीति तैयार

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को थामने के लिए वन विभाग अब एक व्यापक और आधुनिक रणनीति पर काम कर रहा है। राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन रणनीति के तहत तैयार हो रहे इस एक्शन प्लान का मुख्य उद्देश्य जान-माल की क्षति को न्यूनतम स्तर पर लाना है। विभाग अब केवल वन्य जीवों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीणों को उनके साथ सुरक्षित रूप से रहने के गुर भी सिखाएगा।

प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने बताया कि इसके तहत जागरूकता शिविरों के माध्यम से लोगों को खेतों और जंगलों में सतर्क रहने, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वन्य जीव सामने आने पर सही व्यवहार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सोलर फेंसिंग और बायोफेंसिंग जैसे वैज्ञानिक उपायों के साथ-साथ ‘वन्यजीव मित्र’ और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों के जरिए सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश का करीब 71.05 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से घिरा हुआ है। यही वजह है कि यहां गुलदार, हाथी, भालू, जंगली सूअर और बंदरों समेत कई वन्य जीवों की बड़ी आबादी मौजूद है। बीते कुछ वर्षों में जंगलों के आसपास बसे गांवों और कस्बों में वन्य जीवों की आवाजाही तेजी से बढ़ी है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार के हमले और तराई में हाथियों के उत्पात की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000 से 25 अप्रैल 2026 तक वन्यजीवों के हमलों में 1313 लोगों की मौत हुई है, जबकि 6727 लोग घायल हुए हैं। केवल वर्ष 2026 में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है और 110 लोग घायल हुए हैं।

इसे देखते हुए अब विभाग लोगों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है। गांवों में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे, जहां ग्रामीणों को बताया जाएगा कि वन्य जीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में कैसे सतर्क रहें। खेतों और जंगलों में जाते समय समूह में चलना, टॉर्च और शोर करने वाले उपकरण साथ रखना, बच्चों को अकेले न भेजना और रात के समय अनावश्यक आवाजाही से बचना जैसी सावधानियां लोगों को सिखाई जाएंगी। इसके अलावा वन्य जीव सामने आने पर घबराने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखने और तुरंत विभाग को सूचना देने की जानकारी भी दी जाएगी।

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