उत्तराखंड

हाईटेक रडार के घेरे में चारधाम मार्ग: भूस्खलन और बादल फटने की पहले मिलेगी सूचना, केंद्र ने कसी सुरक्षा की कमान

देहरादून। चारधाम यात्रा को आपदा-मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष तकनीक का सुरक्षा कवच तैयार किया है। यात्रा मार्ग के सबसे संवेदनशील 100 किलोमीटर के दायरे में अब ‘आईएनएसएआर’ (InSAR) और ‘लिडार’ (LiDAR) जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों से निगरानी की जाएगी। यह हाईटेक सिस्टम जमीन की सूक्ष्म हलचलों को भांपकर भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं की जानकारी समय से पहले दे देगा, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की जान सुरक्षित की जा सकेगी।

चारधाम यात्रा में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में बारिश और मौसम परिवर्तन के दौरान भूस्खलन की घटनाओं से जीवन का जोखिम बना रहता है। अचानक सड़क बंद होने से यात्री फंस जाते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह नई प्रणाली सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परियोजना में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की, टीएचडीसी इंडिया लि. और जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया जैसे संस्थान भी सहयोग कर रहे हैं। साथ ही ड्रोन तकनीक के जरिए विस्तृत सर्वेक्षण और डेटा संग्रहण भी किया जा रहा है।

आईएनएसएआर एक सैटेलाइट आधारित तकनीक है। जो जमीन की बहुत सूक्ष्म हलचलों को भी पहचान सकती है। यह अंतरिक्ष से ऐसे क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें लेकर उनकी तुलना करता है। यदि किसी पहाड़ी ढलान में धीरे-धीरे खिसकाव या दरारें विकसित हो रही हों तो इससे पहले ही संकेत मिल जाता है। ऐसे में संभावित भूस्खलन से पहले चेतावनी जारी की जा सकती है।

लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (लिडार) में ड्रोन से लेज़र किरणें जमीन की ओर भेजी जाती हैं। जो जमीन से टकराकर वापस लौटती हैं। लौटने में लगे समय से मशीन यह मापती है कि जमीन कितनी ऊंची-नीची है। इससे इलाके का सटीक थ्रीडी नक्शा तैयार होता है और पहाड़ के कमजोर हिस्सों की पहचान आसानी से हो जाती है।

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