
- रिकॉर्ड तोड़ संख्या: मंगलवार को एक ही दिन में 21,134 श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
- सुरक्षा का अभेद्य घेरा: संपूर्ण क्षेत्र 3 सुपर जोन और 47 सेक्टरों में विभाजित; SDRF और NDRF की टीमें मुस्तैद।
- स्मार्ट व्यवस्था: टोकन प्रणाली से सुगम दर्शन और 600 से अधिक स्ट्रीट लाइटों से रात्रि आवागमन सुरक्षित।
- ग्रीन केदारनाथ: सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध और ईको-फ्रेंडली विकल्पों पर जोर।
- पशु कल्याण: घोड़ा-खच्चरों का बीमा अनिवार्य और पशु क्रूरता पर सख्त निगरानी।
रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम की यात्रा वर्ष 2026 में श्रद्धा और सुशासन के एक नए अध्याय की साक्षी बन रही है। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के साथ ही बाबा के दर पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है, जिसका प्रमाण यात्रा के पहले सात दिनों में ही 2,07,452 श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड उपस्थिति से मिलता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल मार्गदर्शन और जिला प्रशासन की दूरदर्शी कार्ययोजना के चलते, भारी बर्फबारी और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यात्रा को ‘सुरक्षित, सुगम और ग्रीन यात्रा’ के संकल्प के साथ संचालित किया जा रहा है। प्रशासन ने इस बार न केवल आधुनिक तकनीक और सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए हैं, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ जैसे आयामों को जोड़कर केदारनाथ यात्रा को एक आदर्श स्वरूप प्रदान किया है।
यात्रा मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियाँ की गई हैं। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहाँ आवश्यक मरम्मत कार्य, सड़क पैचवर्क, झाड़ी कटान, साइनेज और क्रैश बैरियर लगाए गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं रुद्रप्रयाग पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-107 का स्थलीय जायजा लिया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा क्षेत्र को 3 सुपर जोन, 17 जोन और 47 सेक्टर में विभाजित किया गया है, जबकि ट्रैफिक प्रबंधन के लिए अलग से सुपर जोन और ट्रैफिक जोन बनाए गए हैं। आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी मजबूत इंतजाम किए गए हैं। एसडीआरएफ की 8 टीमें, फायर सर्विस की 7 टीमें तथा एनडीआरएफ, सीएपीएफ, बम निरोधक दस्ता और एंटी टेरर स्क्वॉड को तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत और प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक विभिन्न स्थानों पर हेल्थ चेकअप सेंटर और अस्थायी चिकित्सा इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। इन केंद्रों पर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाइयाँ, ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। गंभीर स्थिति में हेलीकॉप्टर के माध्यम से त्वरित रेस्क्यू की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के बावजूद प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर बर्फ हटाने का कार्य किया गया है, जिससे पैदल मार्ग को पूरी तरह सुगम बनाया जा सका है और श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल रही है। इस वर्ष पैदल मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़ा-खच्चरों का बीमा अनिवार्य किया गया है। साथ ही, अस्वस्थ या बीमार पशुओं के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है और पशु क्रूरता के मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की गई है, जिससे पशु कल्याण और यात्रियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यात्रा को “ग्रीन यात्रा” के रूप में संचालित किया जा रहा है। सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है और कूड़ा प्रबंधन के लिए डस्टबिन तथा कलेक्शन सिस्टम स्थापित किए गए हैं। संपूर्ण यात्रा मार्ग पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है तथा यात्रियों के लिए साफ-सुथरे शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं। श्रद्धालुओं को इको-फ्रेंडली सामग्री के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है और स्वयंसेवी संस्थाओं तथा प्रशासन के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।यात्रियों की सुविधा के लिए आधारभूत ढाँचे को भी सुदृढ़ किया गया है। पैदल मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर वाटर एटीएम स्थापित किए गए हैं, जिससे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। गौरीकुंड से केदारनाथ तक पूरे मार्ग पर 600 से अधिक स्ट्रीट लाइटें और 300 से अधिक सोलर लाइटें लगाई गई हैं, जिससे रात्रि के समय भी सुरक्षित आवागमन संभव हो सका है। होटल और भोजनालयों में एलपीजी गैस की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर केंद्र से अतिरिक्त गैस आपूर्ति की मांग भी की गई है। इसके अतिरिक्त “वोकल फॉर लोकल” अभियान के तहत स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्वयं सहायता समूहों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार और आय के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। अंततः जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें, पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें, ताकि यात्रा सुरक्षित, सुगम और सफल बन सके।



