उत्तराखंड

हेलीकाप्टर से भी शुरू हुई बबीता की तलाश, 150 जवान छान रहे चप्पा-चप्पा

उत्तरकाशी। दयारा बुग्याल ट्रैक क्षेत्र में लापता हुई रामनगर निवासी 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। वर्तमान में आईटीबीपी, एसडीआरएफ समेत विभिन्न विभागों और एजेंसियों के करीब 150 अधिकारी, जवान और विशेषज्ञ छात्रा की तलाश में दिन-रात जुटे हुए हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में चल रहा यह अभियान उत्तरकाशी के हाल के सबसे बड़े सर्च ऑपरेशनों में शामिल हो गया है। इसक अलावा रविवार को सर्च आपरेशन में हेलीकाप्टर से भी आसपास के क्षेत्र को खंगाला गया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में संचालित इस अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, राजस्व पुलिस, वन विभाग, आईटीबीपी, आपदा प्रबंधन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) और विशेष रूप से गठित स्पेशल ड्राइव टीमों को लगाया गया है। सभी एजेंसियां समन्वय के साथ संभावित स्थानों पर लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।

खोज अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए रविवार को नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (एनआईएम), उत्तरकाशी की विशेषज्ञ टीम को भी मैदान में उतारा गया। पर्वतीय क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियानों का व्यापक अनुभव रखने वाली एनआईएम टीम ने दयारा बुग्याल ट्रैक, जंगलों, खाइयों और अन्य दुर्गम क्षेत्रों में विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। प्रशासन को उम्मीद है कि विशेषज्ञ पर्वतारोहियों की मदद से अभियान को नई दिशा मिलेगी। प्रशासन के अनुसार दयारा बुग्याल का क्षेत्र भौगोलिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है। ऊंचाई वाले ट्रैक, घने जंगल, गहरी खाइयां और लगातार बदलता मौसम खोज अभियान को कठिन बना रहे हैं। ऐसे में पूरे क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटकर अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संभावित ट्रैकिंग मार्गों, नदी-नालों, जंगलों और दूरस्थ स्थानों पर लगातार सघन तलाशी ली जा रही है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने संबंधित अधिकारियों को खोज अभियान में किसी प्रकार की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रा की सुरक्षित बरामदगी प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।

अभियान की नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है। हालांकि एक सप्ताह बीतने के बाद भी अब तक छात्रा का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, लेकिन प्रशासन, बचाव दल और स्थानीय लोग उम्मीद नहीं छोड़े हैं। लगभग 200 कर्मियों और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है। पूरे जिले की नजरें इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं और सभी छात्रा की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।

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