उत्तराखंड

उत्तराखंड में ‘ग्रीन रेल’ के नए युग का आगाज, शत-प्रतिशत विद्युतीकृत हुआ राज्य का रेल नेटवर्क

देहरादून। उत्तराखंड का संपूर्ण रेल नेटवर्क अब पूरी तरह से विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे राज्य में ‘ग्रीन रेल’ के एक नए स्वर्ण युग की शुरुआत हो गई है। हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, कोटद्वार और काशीपुर जैसे प्रमुख रेल मार्ग अब शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर दौड़ रहे हैं। धार्मिक, पर्यटन और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील इस राज्य में इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन से न केवल रेल यात्रा अधिक तेज, भरोसेमंद और किफायती होगी, बल्कि चारधाम यात्रा पर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

रेलवे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से डीजल की खपत में भारी गिरावट आई है, जिससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ी मजबूती मिली है।उत्तराखंड के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य धार्मिक, पर्यटन और सामरिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। हर साल लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश के साथ चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। इलेक्ट्रिक रेल नेटवर्क से यात्रियों को अधिक भरोसेमंद और बेहतर रेल सेवाएं मिलने की उम्मीद है। भविष्य में बनने वाली नई रेल लाइनों और मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी शुरुआत से ही विद्युतीकरण के साथ विकसित किया जा रहा है। विद्युतीकरण से रेलवे की डीजल पर निर्भरता भी तेजी से घटी है।

वर्ष 2015-16 में रेलवे संचालन के लिए 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती थी, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 108 करोड़ लीटर रह गई। इससे लगभग 185 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई, जिसके कारण विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी आई है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सड़क मार्ग से एक टन माल को एक किलोमीटर तक ले जाने पर 101 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है, जबकि रेलवे में यह केवल 11.5 ग्राम है। यानी रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 89 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है।

भारतीय रेलवे जून 2026 तक 1,161 मेगावाट सौर और 103 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित कर चुका है। नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से उत्तराखंड सहित पूरे देश में स्वच्छ, हरित और टिकाऊ रेल परिवहन को नई मजबूती मिलेगी। रेलवे का लक्ष्य भविष्य में अपनी बिजली की जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा से पूरा करना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार देश के 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। इस उपलब्धि के साथ भारत रेलवे विद्युतीकरण के मामले में स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय रेलवे संघ (यूआईसी) की जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार स्विट्जरलैंड शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के साथ पहले स्थान पर है, जबकि भारत 99.6 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। चीन 82 प्रतिशत, स्पेन 67 प्रतिशत, जापान 64 प्रतिशत, फ्रांस 60 प्रतिशत और ब्रिटेन 39 प्रतिशत विद्युतीकरण के साथ भारत से पीछे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014 से पहले लगभग 60 वर्षों में 21,801 मार्ग किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण हुआ था, जबकि वर्ष 2014 से 2026 के बीच 48,072 मार्ग किलोमीटर का विद्युतीकरण पूरा किया गया। इसे दुनिया के सबसे तेज रेलवे विद्युतीकरण अभियानों में शामिल माना जा रहा है।

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