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चमोली के वाण गांव की बेटी का कमाल: हैदराबाद मैराथन में भागीरथी बिष्ट ने जीता रजत पदक, 2:51 घंटे में पूरी की 42 किमी दौड़

Gopeshwar, 04 September, 2026। अभावों और संघर्षों को पीछे छोड़ उत्तराखंड के पहाड़ की बेटी भागीरथी बिष्ट सफलता के नए आयाम गढ़ रही हैं। चमोली जिले के दूरस्थ वाण गांव की रहने वाली 24 वर्षीय एथलीट भागीरथी ने हैदराबाद में आयोजित 42 किलोमीटर की प्रतिष्ठित मैराथन में दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया है। उन्होंने यह दूरी मात्र 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। पिता के साये के बिना दुर्गम रास्तों पर कठिन अभ्यास कर यहां तक पहुंचीं भागीरथी का अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। भागीरथी के लिए यह रजत पदक सिर्फ एक प्रतियोगिता में हासिल की गई उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे पहाड़ के दुर्गम गांव से शुरू हुआ वह सफर है, जिसमें सुविधाएं कम थीं, लेकिन हौसला बड़ा था। भागीरथी जब तीन वर्ष की थीं तो उनके पिता सोहन सिंह बिष्ट का निधन हो गया।

माता राधा देवी ने अकेले ही पूरे परिवार को संभाला। वे गांव के ही एक स्कूल में बच्चों के लिए भोजन बनाने का कार्य करके अपने पांच बच्चों का पालन-पोषण करती रहीं। वाण गांव की कठिन पगडंडियां, चढ़ाई और उतराई वाले रास्ते और सीमित संसाधन ही उनकी शुरुआती तैयारी का हिस्सा बने। पहाड़ में दौड़ना अपने आप में किसी अभ्यास से कम नहीं। कभी चढ़ाई कदमों की रफ्तार रोकती है तो कभी उतराई शरीर का संतुलन परखती है। भागीरथी ने इन्हीं कठिन रास्तों के बीच अपनी सहनशक्ति विकसित की। उनके लिए हर सुबह की दौड़ केवल शरीर को मजबूत करने की कवायद नहीं थी, बल्कि अपने सपने को जिंदा रखने की कोशिश भी थी।

मैराथन में 42 किलोमीटर की दूरी पूरी करने के लिए केवल तेज दौड़ना पर्याप्त नहीं होता। शरीर को लंबे समय तक थकान सहने की आदत डालनी पड़ती है। सांसों को नियंत्रित करना, गति को बनाए रखना और आखिरी किलोमीटर तक हिम्मत न हारना खिलाड़ी की असली परीक्षा होती है। भागीरथी ने लगातार अभ्यास और अनुशासन के जरिए खुद को इन चुनौतियों के लिए तैयार किया। भागीरथी के कोच हिमाचल प्रदेश के सिरमौर निवासी और अंतरराष्ट्रीय मैराथन एथलीट सुनील शर्मा के अनुसार, वह लगातार कठिन प्रशिक्षण ले रही हैं। उनकी मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह इससे पहले ईरान में आयोजित 42 किलोमीटर मैराथन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित कई मैराथन प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। भागीरथी की दौड़ अभी थमी नहीं है। हैदराबाद का रजत उनके लिए अगली मंजिल की तैयारी है। उनका सपना ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और मैराथन में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। कोच सुनील शर्मा का कहना है कि भागीरथी में प्रतिभा के साथ कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत करते रहने की मजबूत इच्छाशक्ति है।

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