उत्तराखंड

ऋषिकेश महायोजना: धार्मिक और पर्यटन नगरी के सुनियोजित विकास और कायाकल्प की तैयारी

Dehradun, 31 August, 2026। बढ़ती आबादी, निरंतर बढ़ते पर्यटक दबाव और यातायात की जटिल समस्याओं से निपटने के लिए धामी सरकार ने विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन नगरी ऋषिकेश के कायाकल्प की कवायद तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर आवास विभाग द्वारा तैयार की जा रही ‘ऋषिकेश महायोजना’ शहर के भावी शहरी और आर्थिक विकास को एक सुनियोजित दिशा देने का प्रयास है। देहरादून, टिहरी और पौड़ी—इन तीन जिलों से जुड़े इस वृहद क्षेत्र के लिए सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक कर नियोजन संबंधी तकनीकी मानकों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस महायोजना में जहां एक ओर पार्किंग, सड़क चौड़ीकरण और पर्यटन ढांचे को मजबूत करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटे होने के कारण पौड़ी क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए निर्माण गतिविधियों और भवनों की ऊंचाई को नियंत्रित रखने का संतुलित मॉडल अपनाया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल के संबंधित विकास प्राधिकरणों के साथ समीक्षा बैठक हुई। इसमें भवनों की ऊंचाई, सड़क की चौड़ाई, यातायात व्यवस्था, आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों समेत महायोजना से जुड़े तकनीकी और नियोजन संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ऋषिकेश महायोजना का क्षेत्र तीन जिलों से जुड़ा होने के कारण देहरादून, टिहरी और पौड़ी के विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए थे। टिहरी और पौड़ी प्राधिकरणों ने अपने बोर्ड से अनुमोदित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध करा दिए हैं।

बैठक में इन प्रस्तावों और अधिकारियों की टिप्पणियों का परीक्षण किया गया। क्षेत्र की जरूरत और सड़कों की चौड़ाई के अनुरूप भवनों की ऊंचाई निर्धारित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। टिहरी में राष्ट्रीय राजमार्ग की मौजूदगी और विकासात्मक जरूरतों को देखते हुए भवन ऊंचाई को मैदानी क्षेत्रों के मानकों के अनुरूप रखने का अनुरोध किया गया है। वहीं, पौड़ी क्षेत्र राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटा होने के कारण यहां पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भवनों की ऊंचाई सीमित रखने के सुझाव को उपयुक्त माना गया। महायोजना में आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ पर्यटन गतिविधियों, पार्किंग, सड़क नेटवर्क, यातायात और आधारभूत ढांचे के विकास को भी समग्र रूप से शामिल किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार हो और स्थानीय लोगों को भी बेहतर शहरी सुविधाएं मिल सकें। इससे शहर के अनियोजित विस्तार पर रोक लगाने और भविष्य के विकास को स्पष्ट दिशा देने में मदद मिलेगी।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को महायोजना से जुड़े लंबित कार्य प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की महायोजना केवल भूमि उपयोग का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के शहरी और आर्थिक विकास की आधारशिला है। उन्होंने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। खासकर राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से लगे क्षेत्रों में निर्माण और विकास गतिविधियों की योजना बनाते समय पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

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