उत्तराखंड में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की नई पहल: प्रवासियों के लिए बनेगा एकीकृत डिजिटल पोर्टल

Dehradun, 02 September, 2026। उत्तराखंड में खाली हो रहे गांवों को फिर से बसाने और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर प्रवासियों को उनके ही गांव में रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए एक एकीकृत (एकीकृत) डिजिटल पोर्टल तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रवासियों की सुविधा के लिए पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकार की विभिन्न रोजगारपरक और स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की तैयारी है। प्रवासी अपनी योग्यता, रुचि और गांव में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर योजनाओं का चयन कर सकेंगे। साथ ही ऋण लेने के इच्छुक लोगों को ऑनलाइन आवेदन की सुविधा देने की भी तैयारी है।
घर वापसी करने वाले प्रवासियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांव में रोजगार के विकल्प तलाशना और सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल करना है। अलग-अलग विभागों की योजनाओं के लिए अलग कार्यालयों में संपर्क करना पड़ता है। इससे कई लोग योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पाते। प्रवासी पंचायतों के दौरान भी लोगों ने ऐसी व्यवस्था की जरूरत बताई थी, जहां रोजगार, स्वरोजगार, प्रशिक्षण, ऋण और सरकारी सहायता से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफार्म पर मिल सके। पलायन निवारण आयोग की बैठक में इस सुझाव पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने और आवेदन प्रक्रिया को सरल करने के निर्देश दिए। आयोग का मानना है कि रोजगार की स्पष्ट जानकारी, आसान आवेदन प्रक्रिया और वित्तीय सहायता उपलब्ध होने से प्रवासियों का गांव लौटने का भरोसा मजबूत होगा। इससे लंबे समय से खाली होते गांवों में आबादी के साथ निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों की वापसी का रास्ता भी तैयार हो सकेगा।
पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डा. एसएस नेगी के अनुसार एकीकृत पोर्टल के जरिए प्रवासियों को उनकी रुचि और योग्यता के अनुरूप उपलब्ध योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। इससे कृषि, बागवानी, पशुपालन, पर्यटन, लघु उद्योग और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने के अवसर बढ़ेंगे। उनका कहना है कि प्रवासी पंचायतों में लगातार ऐसे लोग सामने आ रहे हैं, जो गांव लौटना चाहते हैं, लेकिन स्थायी आय के साधन को लेकर आश्वस्त होना चाहते हैं। यदि उन्हें स्थानीय संसाधनों, प्रशिक्षण, सरकारी सहायता और ऋण योजनाओं से जोड़ा जाए तो रिवर्स पलायन को गति मिल सकती है।
सरकार की कोशिश केवल प्रवासियों को गांव वापस लाने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य यह है कि लौटने वाले लोग स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार पैदा करें। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। प्रस्तावित पोर्टल प्रवासियों और सरकारी योजनाओं के बीच डिजिटल पुल की भूमिका निभा सकता है। खासकर शहरों में रह रहे ऐसे प्रवासी, जो गांव लौटने की योजना बना रहे हैं, वे पहले ही अपनी जरूरत और रुचि के अनुसार उपलब्ध विकल्प देख सकेंगे।



