मंडुवे-झंगोरे के स्वाद से आत्मनिर्भरता, महिलाएं हर साल कमा रहीं 13 लाख रुपये

Rudraprayag, 02 September, 2026। पहाड़ के पारंपरिक खान-पान का स्वाद अब ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का नया जरिया बन रहा है। अगस्त्यमुनि ब्लॉक में ‘सुमतिसुधा स्वयं सहायता समूह’ की छह महिलाओं ने अपने हुनर के बल पर ‘सरस रेस्टोरेंट’ को एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित किया है। मंडुवे, झंगोरे और पहाड़ी दालों के जायके से सजे इस रेस्टोरेंट के जरिए महिलाएं न सिर्फ पहाड़ की खान-पान संस्कृति को नया जीवन दे रही हैं, बल्कि सालाना 12 से 13 लाख रुपये की कमाई कर अपने परिवारों की तस्वीर भी बदल रही हैं। यह रेस्टोरेंट उनके लिए सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन की पहचान बन चुका है।
‘सरस रेस्टोरेंट’ की सबसे बड़ी खासियत इसका स्थानीय स्वाद है। यहां ग्राहकों को मंडुवे, झंगोरे और विभिन्न प्रकार की पहाड़ी दालों से तैयार पारंपरिक एवं पौष्टिक व्यंजन परोसे जाते हैं। स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर महिलाएं किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती दे रही हैं। साथ ही पहाड़ की पारंपरिक खान-पान संस्कृति को नई पीढ़ी और बाहर से आने वाले लोगों तक पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। रेस्टोरेंट की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसे छह महिलाओं ने मिलकर आगे बढ़ाया है। भोजन तैयार करने से लेकर ग्राहकों की सेवा और रेस्टोरेंट के प्रबंधन तक की जिम्मेदारियां महिलाएं स्वयं संभालती हैं। नियमित रोजगार और आय ने उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इससे महिलाओं के भीतर निर्णय लेने और अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
महिलाओं को इस पहल में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से सहयोग और मार्गदर्शन मिला। सरकारी योजनाओं और स्वयं सहायता समूह की सामूहिक शक्ति को महिलाओं ने अपने हुनर के साथ जोड़ा और रोजगार का स्थायी अवसर तैयार किया। समूह की संचालक पूनम पंवार के अनुसार, रेस्टोरेंट से होने वाली आमदनी ने छह परिवारों की आजीविका को मजबूती दी है। साथ ही आसपास की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।
सुमतिसुधा समूह की कहानी उस सोच को बदलने वाली मिसाल है, जिसमें पहाड़ की महिलाओं को केवल परिवार की जिम्मेदारियों से जोड़कर देखा जाता है। छह महिलाओं ने साबित किया है कि अवसर मिले तो पहाड़ की महिलाएं हुनर को कारोबार, स्थानीय स्वाद को ब्रांड और मेहनत को आर्थिक ताकत में बदल सकती हैं।



