
हरिद्वार। आगामी कुंभ मेले को दिव्य, भव्य और सुगम बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने वाली ट्रैफिक व्यवस्था को इस बार एक ‘मॉडल’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सोमवार को सीसीआर स्थित मेला भवन में आईजी कुंभ मेला योगेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया गया कि यातायात योजना केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन पर आमजन और श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखकर लागू की जाएगी। इस योजना में शाही स्नान की परंपराओं से लेकर स्थानीय कारोबारियों के हितों का भी पूर्ण समावेश किया जाएगा।
आईजी योगेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यातायात योजना केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल की जरूरतों को देखकर बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि होटल व्यवसायियों से लेकर टैक्सी-टेंपो चालकों तक, सभी के हितों का ध्यान रखा जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालु बिना किसी अवरोध के घाटों तक पहुंचें और स्थानीय निवासियों व व्यापारियों को भी कम से कम असुविधा हो। कुंभ के दौरान एसएसपी नवनीत सिंह ने बैठक में जानकारी दी कि कुंभ के दौरान ट्रैफिक के लिए अलग-अलग ट्रैफिक प्लान लागू किए जाएंगे। जैसे-जैसे श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ेगा, पूर्व निर्धारित वैकल्पिक मार्गों को खोल दिया जाएगा। एसपी ट्रैफिक एवं क्राइम निशा यादव ने तैयार किए गए खाके का प्रेजेंटेशन दिया, जबकि एसपी सिटी अभय सिंह ने हितधारकों की शंकाओं का समाधान किया।
बैठक में मौजूद साधु-संतों और अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधियों ने भी शाही स्नान के दौरान पेशवाई और अन्य धार्मिक जुलूसों के लिए सुगम मार्गों की मांग रखी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि धार्मिक परंपराओं और सुरक्षा मानकों के बीच संतुलन बनाकर ही अंतिम यातायात अधिसूचना जारी की जाएगी। फिलहाल, सभी पक्षों से लिखित सुझाव मांगे गए हैं, जिन्हें मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। कुंभ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुगमता के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रशासन व्यापारियों के सुझावों को प्राथमिकता दे रहा है। पार्किंग स्थलों के चयन और नो-वेंडिंग जोन को लेकर भी व्यापक चर्चा की गई ताकि मुख्य मार्गों पर दबाव कम रहे। इस बार कुंभ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किए जाने की संभावना है।



