
डामटा/उत्तरकाशी। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का अनुमोदन और भव्य शुभारंभ हो रहा है। रविवार को वैदिक मंत्रोच्चारण और पूर्ण धार्मिक परंपरा के साथ विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12:15 बजे और यमुनोत्री धाम के कपाट दोपहर 12:35 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। यह ऐतिहासिक दार्शनिक और पाल के साक्षी बनने के लिए दोनों धामों में 12 हजार से अधिक अस्तित्व में मौजूद हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। सेना के बैंड की धुन, शंखध्वनि और “जय मां गंगे-जय मां यमुना” के उद्घोष से पूरी उत्तरकाशी घाटी भक्तिमय हो गई है।
यहां गंगा लहरी और विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ के बीच श्रद्धालुओं ने प्रथम दर्शन कर स्वयं को धन्य किया। इससे पहले सेना के बैंड की धुनों के साथ सैकड़ों भक्तों के बीच सुबह मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी से गंगोत्री पहुंची, जहां तीर्थ पुरोहितों ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना संपन्न कर कपाट उद्घाटन की परंपरा निभाई। वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट ठीक 12 बजकर 35 मिनट पर खोले गए। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्र, शंखध्वनि और घंटों की अनुगूंज ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया।
रविवार सुबह मां यमुना की पावन डोली अपने शीतकालीन प्रवास खरसाली (खुशीमठ) से भाई शनिदेव की अगुवाई में धाम के लिए रवाना हुई। खरसाली गांव में लोक देवताओं की डोलियों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच मां यमुना को विदाई दी गई, जिसने हर हृदय को भावविभोर कर दिया। डोली यात्रा के दौरान मार्ग में श्रद्धालु “जय मां यमुना” के जयकारों के साथ भक्ति में लीन दिखाई दिए। धाम पहुंचने के बाद हवन, विशेष पूजा और वैदिक अनुष्ठानों के पश्चात कपाट खोले गए, जहां प्रथम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला।



