उत्तराखंड

हरिद्वार के 9 स्टोन क्रेशरों पर मंडराया संकट: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, लग सकता है ताला

नैनीताल। हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर संचालित हो रहे नौ स्टोन क्रेशरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने इन क्रेशरों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और अवैध खनन की आशंकाओं को देखते हुए इन क्रेशरों पर भी वैसी ही बंदी की तलवार लटक रही है, जैसी पूर्व में रायवाला से भोगपुर के बीच 48 क्रेशरों पर चली थी।याचिकाकर्ता अशोक कुमार ने कनखल स्थित मातृसदन संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका में हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र दायर कर मामले को चुनौती दी है। इस प्रकरण में गत 7 अप्रैल को सुनवाई हुई, लेकिन आदेश की प्रति गुरुवार को प्राप्त हुई। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि उच्च न्यायालय ने मातृसदन की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 30 जुलाई 2025 को जारी अपने महत्वपूर्ण आदेश में रायवाला से भोगपुर तक गंगा किनारे संचालित होने वाले 48 स्टोन क्रेशरों को बंद करने के निर्देश दे दिए थे। इसके बाद सभी स्टोन क्रेशर को सील कर दिया गया था।

कहा गया कि हरिद्वार के लक्सर तहसील में भोगपुर से सुल्तानपुर के बीच गंगा नदी के तट पर नौ स्टोन क्रेशर संचालित हो रहे हैं। ये सभी स्टोन क्रेशर गंगा तट से पांच किमी के दायरे में संचालित किए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान के साथ ही अवैध खनन को भी बढ़ावा मिलने की आशंका है। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि इनमें अवनी स्टोन क्रेशर, मां गंगा, अलकनंदा, शुभ, नेशनल, तुलसी, वानिया और किशन स्टोन क्रेशर शामिल हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वीरेंद्र अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से इस मामले में आपत्ति पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

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