प्रशासन की बेरुखी: राजस्व में दिए 15 करोड़, बदले में सुमन नगर पुनर्वास कॉलोनी को मिली सिर्फ बदहाली

हरिद्वार। टिहरी बांध के निर्माण के लिए अपनी जमीन और पुरखों की विरासत कुर्बान करने वाले विस्थापितों की उम्मीदों पर प्रशासन का रवैया भारी पड़ रहा है। बांध परियोजना के तहत बसाई गई सुमन नगर पुनर्वास कॉलोनी आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। विस्थापन के समय जिन ‘आधुनिक सुविधाओं’ का सब्जबाग दिखाया गया था, वे आज खोखले वादे साबित हो रहे हैं। करीब पांच हजार की आबादी वाली इस कॉलोनी में हालात इतने बदतर हैं कि सरकार को करोड़ों का राजस्व देने के बावजूद यहाँ के लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं।
शनिवार को टिहरी बांध पुनर्वास समिति के अध्यक्ष एच एम जोशी ने बताया कि पिछले चार वर्षों में जमीनों की रजिस्ट्री से सरकार की झोली में 15 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व गया, लेकिन बदले में इस कॉलोनी को एक करोड़ रुपये के विकास कार्य भी नसीब तक नहीं हो रहे है। उन्होंने बताया कि पुनर्वास के समय विस्थापितों को आधुनिक सुविधाओं का सपना दिखाया गया था, जो आज ‘खोखला’ साबित हो रहा है। करीब पांच हजार की आबादी वाली इस कॉलोनी में सड़कें 15 साल बाद भी निर्माण की राह तक रही हैं। जोशी ने बताया कि सड़कों के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है, जो कुछ ही महीनों में उखड़ जाती हैं। बताया कि शाम ढलते ही पूरी कॉलोनी अंधेरे में डूब जाती है।



