मानसून की पहली बारिश से ही पहाड़ों से बरस रहे पत्थर और मलबा

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही पहाड़ों पर आफत का दौर शुरू हो गया है। पहली ही तेज बारिश ने पूरे प्रदेश में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे चारधाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बदरीनाथ, केदारनाथ और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई जगहों पर भारी भूस्खलन और चट्टानें गिरने से यातायात ठप है। हालांकि प्रशासन वैकल्पिक मार्गों और मशीनों के जरिए रास्ता खोलने में जुटा है, लेकिन मानसून की इस शुरुआती रफ्तार ने सरकारी दावों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की पोल खोल दी है।
सबसे अधिक प्रभावित मार्गों में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग सिरोबगड़ के पास मलबा और चट्टानें गिरने से करीब तीन घंटे अवरुद्ध रहा। प्रशासन ने सिरोबगड़ में यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग से यातायात संचालित कराया। वहीं चमोली में गुलाबकोटी के पास भारी भूस्खलन से बदरीनाथ हाईवे देर शाम तक नहीं खुल पाया था।
वहीं केदारनाथ हाईवे बांसवाड़ा और सोनप्रयाग क्षेत्र में भूस्खलन के कारण बंद पड़ा है। इसके अलावा यमुनोत्री हाईवे पर भी मलबा आने से यातायात ठप हो गया है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मार्ग खोलने का कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने पर जल्द यातायात बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि मानसून की शुरुआत में ही चारधाम मार्गों का बार-बार बाधित होना आपदा प्रबंधन और पूर्व तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। यात्रियों से मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की गई है।
- गुमखाल के पास वाहन पर गिरा बोल्डर: कोटद्वार के सतपुली-पौड़ी मोटर मार्ग पर गुरुवार को गुमखाल के पास एक इनोवा वाहन पर अचानक मलबा और पत्थर गिरने से अफरा-तफरी मच गई। ये सभी लोग किर्खू से दिल्ली जा रहे थे। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम सब इंस्पेक्टर सावर सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर वाहन में फंसे सभी छह यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सभी एक ही परिवार के सदस्य थे ।



