अब हाईटेक होगी जोशीमठ की सुरक्षा, जमीन के अंदर की हर हलचल पर रहेगी वैज्ञानिक नजर

देहरादून। जोशीमठ में भू-धंसाव की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नज़र रखने के लिए जल्द ही आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने गुरुवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में पुनर्वास कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि केंद्र से मिली ₹292 करोड़ की पहली किस्त से प्रभावित क्षेत्र में ड्रेनेज और ढाल स्थिरीकरण का काम तेजी से चल रहा है, जबकि असुरक्षित घोषित किए जा चुके 55 भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। गुरुवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में एनडीएमए की सदस्य रीता मिस्सल और सदस्य दिनेश कुमार असवाल ने जोशीमठ पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की।
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। एनडीएमए ने पुनर्वास कार्यों की प्रगति पर संतोष जताते हुए सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। सदस्य दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि जोशीमठ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में केवल पुनर्वास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भू-धंसाव की सतत वैज्ञानिक निगरानी भी जरूरी है।
आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित होने से भूमि में होने वाले सूक्ष्म बदलावों का वास्तविक समय में आकलन किया जा सकेगा, जिससे आपदा जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। बैठक में डॉ. एसके जेना, संयुक्त सलाहकार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, एनडीएमए के वरिष्ठ सलाहकार शशांक मिश्रा, वरिष्ठ सलाहकार अरुण कुमार नटराजन सुब्रमणियन, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष राजेश चंद्रा, सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष सुभाष चंद्रा, यूयूएसडीए के अपर निदेशक विनय मिश्रा, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, डॉ. मोहित पूनिया उपस्थित रहे। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि केंद्र सरकार से प्राप्त 292 करोड़ रुपये की पहली किस्त से ढाल स्थिरीकरण, टो प्रोटेक्शन, सीवर और ड्रेनेज सहित विभिन्न कार्य तेजी से चल रहे हैं। वहीं, जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि असुरक्षित घोषित 55 भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।



