उत्तराखंड

उत्तराखंड में सुरक्षित होंगे राष्ट्रीय राजमार्ग, जल्द लागू होगा इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम

Dehradun, 24 August, 2026। राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों को रोकने और यातायात प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) और एआई आधारित तकनीकों का सहारा लेने जा रही है। सेंसर, कैमरों और डेटा एनालिटिक्स के जरिए न केवल ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की जाएगी, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) घटाकर आपातकालीन सहायता भी तेजी से पहुंचाई जाएगी। उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों में, जहां अकेले इस साल 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, यह आधुनिक प्रणाली सड़क सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए एक बड़ा कदम साबित होगी। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (एनआरएसबी) के अध्यक्ष डॉ. नितिन आर. गोकर्ण के अनुसार इन प्रणालियों से दुर्घटनाओं की स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम करने और आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जोखिम वाले स्थानों की पहचान और उनका वैज्ञानिक प्रबंधन भी प्राथमिकता में रहेगा। देशभर में दुर्घटना संभावित शीर्ष दस स्थानों की पहचान करने पर जोर दिया गया है। साथ ही टोल प्लाजा कर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण देने की जरूरत बताई गई, ताकि दुर्घटना के तुरंत बाद पीड़ितों को शुरुआती सहायता मिल सके। भविष्य की रणनीति में सुरक्षित राजमार्ग इंजीनियरिंग, गति प्रबंधन, सुरक्षित संचालन, वाणिज्यिक वाहनों की सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा प्रबंधन, निगरानी और निर्णय सहायता प्रणाली को एकीकृत किया जाएगा। सड़क सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से सड़क परियोजनाओं के सुरक्षा प्रभावों की भी व्यवस्थित जांच होगी।

पिछले दिनों राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए नई दिल्ली स्थित एनएचएआई मुख्यालय में एनएचएआई और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड की बैठक हुई। इसमें नियमित समीक्षा और सतत सहयोग के लिए बनी व्यवस्था जारी रखने पर सहमति बनी। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम ऐसी तकनीकी व्यवस्था है, जिसमें सेंसर, कैमरे, जीपीएस, संचार नेटवर्क, डेटा एनालिटिक्स और एआई जैसी तकनीकों के जरिए यातायात की निगरानी और प्रबंधन किया जाता है। यह सिस्टम सड़क पर वाहनों की गति, यातायात दबाव, दुर्घटना या अन्य बाधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण करता है। इसके आधार पर वाहन चालकों और संबंधित एजेंसियों को समय पर अलर्ट दिए जा सकते हैं। दुर्घटना की स्थिति में निकटतम एम्बुलेंस या आपातकालीन सेवा तक सूचना तेजी से पहुंचाई जा सकती है। यानी इसका उद्देश्य हादसा होने के बाद तेजी से प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ संभावित जोखिमों की पहले पहचान कर उन्हें रोकना भी है।

विषम भूगोल वाले प्रदेश में सड़क हादसों पर अंकुश लगाना चुनौती बनता जा रहा है। उत्तराखंड में जनवरी से अब तक 300 से ज्यादा लोग सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं। जबकि 878 घायल हुए हैं। ऐसे में प्रदेश में भी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की जरूरत महसूस की जा रही है।

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