उत्तराखंड

शिक्षा के साथ संस्कार और अनुशासन जरूरी: सीएम धामी

Dehradun, 09 September, 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किताबी ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन को अनिवार्य बताया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘कुसुम कांता फाउंडेशन’ एवं ‘मंथन वेलफेयर एसोसिएशन’ द्वारा आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ के दौरान उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अभिभावकों और शिक्षकों से मिलकर बच्चों में नैतिक मूल्य विकसित करने का आह्वान किया। मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में संबोधित कर रहे थे।

इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में रहा है। सरकार प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, आर्यन देव उनियाल उपस्थित रहे। धामी ने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी को दृष्टि, आत्मविश्वास और संस्कार देने वाला मार्गदर्शक है। एक शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को सुविधाओं के साथ अपना समय देने और हर परिस्थिति में उनका सकारात्मक मार्गदर्शन करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने को कहा।

  • शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार : निशंक: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. कुसुम कांता को भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाजसेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कारों को हमेशा महत्वपूर्ण स्थान दिया। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं समाज हित में किए जा रहे कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हैं। डॉ. निशंक ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा देने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करें। उन्होंने कुसुम कांता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

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