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कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व: 15 नवंबर से शुरू होगा नया पर्यटन सत्र, जीपीएस, ड्रोन और सीसीटीवी से होगी हाईटेक निगरानी

Dehradun, 12 September, 2026। कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में 15 नवंबर से शुरू होने वाले आगामी पर्यटन सत्र में वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था को बेहद सख्त किया जाएगा। नए सत्र के तहत दोनों रिजर्वों की सभी जिप्सियों को जीपीएस से लैस किया जाएगा, संवेदनशील इलाकों व गेटों पर सीसीटीवी लगाए जाएंगे और सफारी के दौरान ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी। इसके साथ ही, वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर पर्यटकों द्वारा सफारी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को भी सख्ती से लागू कराया जाएगा।

इस बार वन विभाग का फोकस नियमों के पालन के साथ पर्यटकों और वन्यजीवों की सुरक्षा पर रहेगा। सफारी के दौरान पर्यटकों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंध का सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा। वन्यजीव दिखने पर अक्सर पर्यटक जिप्सी रुकवाकर मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाने लगते हैं। इससे न केवल वन्यजीवों का व्यवहार प्रभावित होता है, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

कार्बेट में करीब 385 और राजाजी में 237 जिप्सियां पर्यटन गतिविधियों में संचालित होती हैं। सभी जिप्सियों में जीपीएस लगने के बाद वन विभाग उनकी वास्तविक समय में लोकेशन पर नजर रख सकेगा। इससे यह भी पता चल सकेगा कि वाहन निर्धारित मार्ग और ट्रैक पर चल रहा है या नहीं। नियमों का उल्लंघन करने वाली जिप्सियों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी।

वर्षाकाल के दौरान क्षतिग्रस्त हुए सफारी ट्रैक की मरम्मत का काम अक्टूबर में कराया जाएगा। कार्बेट में जिप्सियों का पंजीकरण शुरू हो चुका है, जबकि राजाजी में यह प्रक्रिया सितंबर के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले दोनों रिजर्व में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है।

सफारी के दौरान चालक और नेचर गाइड पर्यटकों को जंगल के नियमों और वन्यजीवों के व्यवहार की जानकारी देते हैं। ऐसे में उन्हें वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी, पर्यटन जोन के नियम और संरक्षण संबंधी प्रावधानों की जानकारी देना जरूरी है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला और राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे के अनुसार चालकों और नेचर गाइड का प्रशिक्षण सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले पखवाड़े में कराया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार हाईटेक निगरानी और प्रशिक्षित स्टाफ के जरिए सफारी को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाएगा।

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