उत्तराखंड

वसुंधरा ताल में स्थापित हुई हाई-टेक निगरानी प्रणाली, बर्फ के भीतर के बदलावों से लेकर जलस्तर तक पर रहेगी पैनी नजर

Dehradun, 27 October, 2026। हिमालयी क्षेत्र में संभावित आपदाओं के जोखिम को कम करने और पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चमोली जिले के दुर्गम वसुंधरा ताल में एक अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के इस संयुक्त प्रयास से अब झील के जलस्तर, मौसम, भू-गतिविधियों और बर्फ की गहराइयों में होने वाले तापमान परिवर्तनों पर रीयल-टाइम नजर रखी जा सकेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सतर्कता बरती जा सके। वसुंधरा ताल में निगरानी का दायरा केवल बर्फ तक सीमित नहीं है।

यहां मौसम, झील के जलस्तर, हिमस्खलन और जमीन की हलचल पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए मौसम सेंसर, फ्लोटिंग और सबमर्ज्ड वाटर लेवल सेंसर तथा कंपन और झुकाव मापने वाले उपकरण लगाए गए हैं। बर्फ की गहराई मापने के लिए स्नो डेप्थ सेंसर और झील की सतह का तापमान दर्ज करने के लिए एक अतिरिक्त सेंसर भी स्थापित किया गया है। दुर्गम क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सौर पैनल और 280 एम्पीयर क्षमता की बैटरी लगाई गई है। पर्याप्त धूप नहीं मिलने पर यह बैटरी लगभग दस दिन तक बैकअप देने में सक्षम है। उपकरणों का फाउंडेशन स्थानीय पत्थरों और स्टील के मॉड्यूलर डिजाइन से तैयार किया गया है। इसे 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

प्रणाली से मिलने वाले आंकड़े सामान्य परिस्थितियों में प्रत्येक दो घंटे में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के डैशबोर्ड पर पहुंचेंगे। आपात स्थिति में सेंसर निर्धारित समय का इंतजार किए बिना तत्काल आंकड़े भेज सकेंगे। इससे असामान्य बदलावों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों को समय रहते सतर्क करने में मदद मिल सकती है। सीबीआरआई रुड़की के वैज्ञानिक और अभियान दल के प्रमुख डॉ. डीपी कानूनगो के अनुसार, वसुंधरा ताल की गहराई लगभग 38.50 मीटर, चौड़ाई 600 मीटर और लंबाई 900 मीटर है। अभियान के दौरान सेंसर और संचार प्रणाली के माध्यम से आंकड़ों के आदान-प्रदान का सत्यापन किया गया। उपलब्ध पुराने आंकड़ों और वर्तमान स्थिति के अनुसार झील के आकार में कोई विशेष बदलाव नहीं मिला है।

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार वसुंधरा ताल में स्थापित निगरानी प्रणाली से बर्फ, जलस्तर, मौसम और आसपास की भू-गतिविधियों में होने वाले बदलावों की जानकारी मिलेगी। आपात स्थिति में तत्काल आंकड़े मिलने से संभावित खतरे के संकेतों को समय रहते समझने और संबंधित एजेंसियों को सतर्क करने में मदद मिलेगी। इससे हिमालयी क्षेत्रों में आपदा निगरानी और पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा। जल्द ही अन्य ताल में भी चेतावनी प्रणाली स्थापित होगी।

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