
Rudraprayag, 26 October, 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को रुद्रप्रयाग पहुंचकर चारधाम सड़क परियोजना के तहत निर्मित अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबे पुल और 900 मीटर लंबी सुरंग मार्ग का निरीक्षण किया। लगभग 1.18 किलोमीटर लंबी इस बायपास परियोजना के शुरू होने से केदारनाथ और बदरीनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग बाजार के भीतर से नहीं गुजरना पड़ेगा। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर भूस्खलन सुरक्षा कार्यों का जायजा लिया तथा जिला प्रशासन के ‘संगम लाइब्रेरी’ अभियान का अवलोकन करते हुए स्वयं 150 पुस्तकें दान कीं। मुख्यमंत्री धामी ने सोमवार को रुद्रप्रयाग पहुंचकर चारधाम सड़क परियोजना के तहत निर्मित पुल-सुरंग मार्ग का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से परियोजना के निर्माण और यातायात व्यवस्था को लेकर जानकारी प्राप्त की।
करीब 156 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। पुल, सुरंग और संपर्क मार्ग सहित परियोजना की कुल लंबाई लगभग 1.18 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क संपर्क और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इससे तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलने के साथ स्थानीय पर्यटन, व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे ढलान सुरक्षा और स्थिरीकरण कार्यों की जानकारी भी ली। इन कार्यों का उद्देश्य भूस्खलन के जोखिम को कम करना और यात्रा मार्ग को सुरक्षित बनाना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के तहत संचालित संगम लाइब्रेरी का भी अवलोकन किया। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल पर शुरू अभियान के अंतर्गत पुस्तकालय को 2,500 से अधिक पुस्तकें मिल चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने भी 150 पुस्तकें दान कीं। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित होगी।
यह परियोजना केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-07) से सीधे जोड़ेगी। इसके शुरू होने से केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग बाजार से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं को भी जाम की समस्या से राहत मिलेगी। पर्यटन सीजन में यातायात व्यवस्था बेहतर होने से यात्रा अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।



