उत्तराखंड

धारचूला की बदहाल सड़कें, आदि कैलाश मार्ग चकाचक, पर मुख्य बाजार गड्ढों और धूल के हवाले

धारचूला। एक ओर जहां करोड़ों रुपये की लागत से आदि कैलाश यात्रा मार्ग को बेहद खूबसूरत और सुगम बनाया गया है, वहीं सीमांत क्षेत्र धारचूला नगर की मुख्य सड़क पिछले कई वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। तवाघाट तिराहे से धारचूला बाजार तक का करीब दो किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और आम जनता के साथ-साथ देश-विदेश से आ रहे आदि कैलाश के तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीवर और पेयजल लाइनों के नाम पर बार-बार होने वाली खुदाई और लोक निर्माण विभाग (PWD) व ठेकेदार के बीच बजट को लेकर चल रही खींचतान के कारण ₹1.25 करोड़ का स्वीकृत पुनर्निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। अधिकारी जहां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं, वहीं इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण पूरा नगर धूल और अव्यवस्था का शिकार बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर यहाँ बार-बार खुदाई तो की जाती है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। कभी सीवर लाइन के नाम पर सड़क खोदी जाती है, तो कभी पेयजल की पाइप लाइन बिछाने के नाम पर। हद तो तब हो जाती है जब जल संस्थान और अन्य विभाग निर्माण कार्यों के बाद मलबे को सड़क किनारे ही लावारिस छोड़ देते हैं। विभागों की इस लापरवाही का सीधा खामियाजा स्थानीय जनता और व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से सड़क पुनर्निर्माण का कार्य प्रस्तावित था, जिसकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद धरातल पर आज तक काम शुरू नहीं हो पाया। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग (PWD) के एई आशीष लुठीं ने बताया कि ठेकेदार द्वारा कोलतार (डामर) की कीमतें बढ़ने का हवाला दिया जा रहा है। ठेकेदार ने विभाग से मूल्य वृद्धि की मांग की है। एई ने कहा, “हमने उच्चाधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया है। अब शासन स्तर पर वार्ता होने के बाद ही काम आगे बढ़ पाएगा।” ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि ठेकेदार ने पहले ही टेंडर ले लिया था, तो बढ़ी हुई लागत के बहाने इसका बोझ आखिर जनता क्यों भुगते? छोटे से सीमांत बाजार की सड़कों की यह बदहाली केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता प्रतीक बन चुकी है। जनता आक्रोशित होकर पूछ रही है कि आखिर धारचूला की इन बदहाल सड़कों का जिम्मेदार कौन है? कब तक लोग गड्ढों, धूल और अव्यवस्था के बीच सफर करने को मजबूर रहेंगे?

इस बीच नगर पालिका अध्यक्ष और पालिका प्रशासन के बीच भी जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। पालिका अध्यक्ष शशि थापा का कहना है कि उन्होंने अधिशासी अधिकारी (EO) सौरभ त्रिपाठी को इस पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, ईओ धारचूला का कहना है कि उन्होंने सड़क खोदने वाले विभागों को नोटिस जारी कर दिए हैं। दूसरी ओर, शासन-प्रशासन की कमान संभाल रहे एसडीएम धारचूला आशीष जोशी का वही रटा-रटाया जवाब है कि पीडब्ल्यूडी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साफ है कि कोई भी विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है और इस विभागीय खींचतान के बीच पूरा नगर अव्यवस्था की बलि चढ़ चुका है। यात्रा सीजन चरम पर होने के कारण प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक आदि कैलाश के दर्शन के लिए धारचूला पहुंच रहे हैं। गुजरात से आईं महिला पर्यटक पुष्पलता बेन ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा, “आदि कैलाश जाने वाली मुख्य सड़क तो बेहद सुंदर और सुगम बनी है, लेकिन धारचूला शहर के भीतर कदम रखते ही सड़कों की हालत देखकर भारी निराशा होती है।” यह प्रतिक्रिया केवल एक पर्यटक की नहीं, बल्कि उस कड़वी हकीकत का आईना है, जिसे धारचूला का हर स्थानीय नागरिक रोज झेलने को मजबूर है।

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