पहाड़ जैसा संघर्ष, कुर्सी के सहारे घायल को 8 किमी पहुँचाया

गोपेश्वर। उत्तराखंड में पहाड़ों पर बेहतर स्वास्थ्य और सड़क सुविधा के तमाम सरकारी दावों की पोल एक बार फिर चमोली जिले की निजमुला घाटी ने खोल दी है। दशोली विकासखंड के सुदूरवर्ती मौली हडूंग गांव में चारा-पत्ती लेने गई एक महिला के पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल होने के बाद, ग्रामीणों को उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए बहुत परेशानियां उठानी पड़ी। गांव तक सड़क न होने के कारण ग्रामीणों ने घायल महिला को कुर्सी के सहारे बांधा और उबड़-खाबड़ रास्तों पर करीब 8 किलोमीटर तक पैदल ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।
घंटों की मशक्कत के बाद जब महिला सड़क तक पहुंची, तब जाकर उसे 108 एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल गोपेश्वर भेजा जा सका। यह घटना एक बार फिर सीमांत गांवों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और ग्रामीणों के संघर्ष की दास्तां बयां कर रही है। दशोली विकासखंड के मौली हडूंग गांव निवासी गुड्डी देवी, पत्नी देवेंद्र सिंह, रोज की तरह जंगल में चारा-पत्ती लेने गई थीं। चारा काटने के दौरान वह पेड़ पर चढ़ी हुई थीं, तभी अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गईं। गिरने से उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह उठने-चलने में असमर्थ हो गईं। घटना की जानकारी मिलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंचे और महिला को सुरक्षित स्थान पर लाकर प्राथमिक सहायता दी।
सड़क न होने के कारण ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घायल महिला को अस्पताल पहुंचाने की थी। ऐसे में ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से डंडी-कंडी तैयार की, जिसमें कुर्सी और लकड़ी का सहारा लिया गया। इसके बाद कई ग्रामीणों ने बारी-बारी से महिला को उठाकर करीब आठ किलोमीटर लंबा दुर्गम पैदल रास्ता तय किया और उसे सड़क तक पहुंचाया। वहां से 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से घायल महिला को जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव तक शीघ्र सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं में समय रहते उपचार मिल सके और लोगों को जान जोखिम में डालकर लंबी दूरी तय न करनी पड़े।



