
- क्यों है खास: कभी इसी मार्ग से बाबा के द्वार जाते थे श्रद्धालु, आपदा के बाद पहली बार हुआ तैयार।
- नियम कड़े: 1.8 मीटर की चौड़ाई के कारण सामान्य पर्यटकों की आवाजाही पर फिलहाल रोक।
- सुविधाएं: शासन को भेजा गया बजट, जल्द तैनात होंगी फर्स्ट एड और रेस्क्यू टीमें।
देहरादून। केदारनाथ की पहाड़ियों पर एक बार फिर उस ऐतिहासिक मार्ग के पत्थरों की गूंज सुनाई देगी, जिसे 2013 की आपदा ने मौन कर दिया था। गरुड़ चट्टी मार्ग अब अपनी नई पहचान के साथ तैयार है। हालांकि, इस बार यहाँ यात्रियों की भीड़ नहीं, बल्कि सुरक्षा का पहरा होगा। प्रशासन ने इसे एक ऐसी ‘इमरजेंसी लेन’ के रूप में विकसित किया है, जो मुख्य ट्रैक पर संकट आने पर श्रद्धालुओं के लिए जीवनदायिनी साबित होगी।अधिकारियों के अनुसार, लगभग 1.8 मीटर चौड़ा यह मार्ग सामान्य आवाजाही के लिए नहीं खोला जाएगा, बल्कि इसे विशेष रूप से आपातकालीन परिस्थितियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। यह मार्ग मुख्य ट्रेक रूट का विकल्प होगा, खासकर तब जब भारी भीड़, खराब मौसम या किसी आपदा के कारण मुख्य रास्ते पर दबाव बढ़ जाए। फिलहाल, केदारनाथ जाने के लिए लिंचोली से होकर गुजरने वाला लगभग 5 मीटर चौड़ा मार्ग ही प्राथमिक रहेगा, जहां से अधिकांश यात्री आवागमन करेंगे। गरुड़ चट्टी मार्ग की बहाली को आपदा प्रबंधन के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
2013 की त्रासदी के बाद से ही इस मार्ग को दोबारा विकसित करने की मांग उठती रही थी। अब इसे इस तरह तैयार किया गया है कि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके। प्रशासन का कहना है कि इस मार्ग के जरिए आपातकाल में श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी और राहत पहुंचाने में आसानी होगी। रुद्रप्रयाग जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि इस मार्ग पर बुनियादी सुविधाओं के विकास की प्रक्रिया जारी है। यहां शौचालय, पेयजल व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और रेस्क्यू टीमों की तैनाती जैसे आवश्यक इंतजाम जल्द किए जाएंगे।



