उत्तराखंड

धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: अब ‘ग्रेजुएट’ ही बन पाएंगे वन दरोगा, संस्कृत शिक्षकों के लिए नई नियमावली को मंजूरी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विकास और सुधार की दिशा में 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी है। सरकार ने वन विभाग में बड़ा बदलाव करते हुए वन दरोगा के लिए न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक (ग्रेजुएशन) कर दी है, साथ ही आयु सीमा भी 21 से 35 वर्ष तय की गई है। कैबिनेट ने संस्कृत शिक्षा नियमावली 2026 को भी हरी झंडी दे दी है, जिससे लंबे समय से अटके शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ होगा। इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग श्रेणी के 7 अतिरिक्त पदों के सृजन और D श्रेणी के ठेकेदारों की कार्य सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ करने जैसे जनहितैषी निर्णय लिए गए हैं। शिक्षा, परिवहन और वन सेवा में हुए ये सुधार राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को नई मजबूती देंगे।

बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने बताया कि सरकार ने अलग-अलग विभागों से जुड़े इन प्रस्तावों को मंजूरी देकर यह संकेत दिया है कि राज्य में विकास कार्यों को और तेज किया जाएगा। खासतौर पर शिक्षा, परिवहन, वन और समाज कल्याण के क्षेत्रों में सुधार पर जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कैबिनेट ने उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, 2016 में भी अहम बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत अब वन दरोगा बनने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक (ग्रेजुएशन) कर दी गई है। यानी अब इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का ग्रेजुएट होना जरूरी होगा। इसके साथ ही वन दरोगा के लिए आयु सीमा भी तय की गई है, जो अब 21 से 35 वर्ष के बीच होगी। वहीं, वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) के पद के लिए आयु सीमा 18 वर्ष से लेकर अधिकतम 25 वर्ष रखी गई है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि कार्मिक विभाग द्वारा पहले से लागू वर्दीधारी नियमावली के प्रावधान आगे भी लागू रहेंगे। यानी नई व्यवस्था के साथ पुराने नियमों का भी पालन जारी रहेगा।

लोक निर्माण विभाग में साल 2023 में जूनियर इंजीनियर के 2010 पदों पर भर्ती की गई थी। इस भर्ती में दिव्यांग श्रेणी के लिए 7 पद तय किए गए थे, लेकिन उस समय इस श्रेणी के योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पाए। ऐसी स्थिति में इन पदों को खाली रखने के बजाय सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से भर दिया गया था। बाद में इस मामले में उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि दिव्यांग श्रेणी के ये पद 2023 से ही खाली (रिक्त) रखे जाने चाहिए थे। चूंकि ये पद पहले ही भर दिए गए थे, इसलिए अब सरकार ने इस स्थिति को सुधारने के लिए नया फैसला लिया है। कैबिनेट ने 2023 से ही दिव्यांग श्रेणी के इन 7 पदों को अलग से सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 को मंजूरी दे दी है। दरअसल इससे पहले प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता और सहायक अध्यापक के कुल 62 पद बनाए गए थे, लेकिन इन पदों के लिए सेवा नियमावली तय नहीं की गई थी। नियमावली न होने की वजह से शिक्षकों के प्रमोशन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में दिक्कतें आ रही थीं। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद सेवा नियमावली लागू हो जाएगी, जिससे शिक्षकों के पदोन्नति और सेवा से जुड़े मामलों में आसानी होगी।

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