
गोपेश्वर। गगनभेदी जयघोष, मंत्रों की गूंज और हजारों रंग-बिरंगे फूलों से महकती हिमालय की वादियां! सोमवार दोपहर ठीक 12:29 बजे पूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विश्व प्रसिद्ध चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अलौकिक और दिव्य क्षण का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों शिवभक्त और साधु-संत दुर्गम रास्तों को पार कर धाम पहुंचे। अब आगामी छह महीनों तक भक्त बाबा शिव के अत्यंत दुर्लभ ‘एकानन’ (मुखमंडल) स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ कमा सकेंगे।
कपाटोद्घाटन की प्रक्रिया रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी पंडित हरीश भट्ट की तरफ से संपन्न कराई गई। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरा हिमालय क्षेत्र “हर-हर महादेव” के जयघोषों से भक्तिमय हो उठा। पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में विशेष महत्व रखने वाले श्री रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के एकानन स्वरूप अर्थात मुखमंडल की पूजा-अर्चना की जाती है।
हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित यह धाम अपनी अलौकिक आध्यात्मिक शक्ति, प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्य रहस्यात्मकता के कारण विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। रुद्रनाथ के पुजारी पंडित हरीश भट्ट ने बताया कि कपाट खुलने के साथ ही आगामी छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की नियमित पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।



