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जापान से आया कुंभ का बुलावा, संतों ने नापी हरिद्वार की तैयारी

हरिद्वार। आगामी महाकुंभ-2027 को लेकर तीर्थनगरी हरिद्वार में तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं, जिसे लेकर देश-विदेश के संत समाज में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल है। हाल ही में श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत डा. रविन्द्र पुरी के नेतृत्व में संतों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गंगा तट पर चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण दल की सबसे खास बात यह रही कि इसमें सात समंदर पार जापान से आईं महामंडलेश्वर स्वामी आदित्यानंद गिरी और साध्वी योगमाता सत्य प्रेम गिरी भी विशेष रूप से शामिल हुईं। संतों के इस दल ने शंकराचार्य चौक से लेकर सिंहद्वार तक बन रहे नए घाटों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए तैयार किए जा रहे बुनियादी ढांचे का बारीकी से जायजा लिया।

इस निरीक्षण के दौरान अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने संत समाज को राज्य सरकार के निर्देशन में चल रहे कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने संतों को आश्वस्त किया कि महाकुंभ को सुगम, स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन दिन-रात काम कर रहा है। वर्तमान में घाट विस्तार, सड़क संपर्क, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता जैसे हर महत्वपूर्ण मोर्चे पर युद्धस्तर पर काम जारी है। महंत डा. रविन्द्र पुरी ने हरिद्वार के इस बदलते स्वरूप और कायाकल्प को अभूतपूर्व बताते हुए प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि कुंभ-2027 अपनी दिव्यता और भव्यता का एक नया वैश्विक रिकॉर्ड स्थापित करेगा और ये नए घाट कुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन में बेहद मददगार साबित होंगे।

कुंभ की इस वैश्विक गूंज का असर अब विदेशों में भी साफ देखा जा सकता है। जापान से आए संतों ने हरिद्वार के इस भव्य स्वरूप की खुलकर प्रशंसा की। महामंडलेश्वर स्वामी आदित्यानंद गिरी ने कहा कि इन व्यापक तैयारियों में भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत की स्पष्ट झलक मिलती है। उन्होंने यह भी साझा किया कि जापान में इन दिनों सनातन दर्शन और योग के प्रति लोगों का आकर्षण बहुत तेजी से बढ़ रहा है, और उनके कई जापानी शिष्य इस बार कुंभ मेले में आने के लिए बेहद उत्साहित हैं। वहीं, साध्वी योगमाता सत्य प्रेम गिरी ने महाकुंभ को संपूर्ण मानवता को एक सूत्र में पिरोने वाला और पूरे विश्व को शांति व सह-अस्तित्व का संदेश देने वाला एक महान उत्सव बताया। संतों के इस दौरे से स्पष्ट है कि महाकुंभ-2027 वैश्विक पटल पर सनातन संस्कृति की एक अद्भुत और अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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