
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी और निर्णायक प्रगति हुई है। चारधाम यात्रा को सुगम बनाने और राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास को रफ्तार देने वाली महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को पूरा करने के लिए दिसंबर 2028 का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस परियोजना की गति बढ़ाने के साथ-साथ उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार, लाइनों के दोहरीकरण और भविष्य के महाकुंभ-2033 की तैयारियों को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि चारधाम यात्रा और पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल लाइन परियोजना की डीपीआर को शीघ्र स्वीकृति देने और इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्रदान करने का अनुरोध किया, ताकि इसकी पूरी लागत केंद्र सरकार वहन कर सके।
इसके साथ ही टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की डीपीआर को भी जल्द मंजूरी देने की मांग उठाई गई। बैठक में हरिद्वार-देहरादून रेल मार्ग के दोहरीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। रेलवे बोर्ड ने जानकारी दी कि हरिद्वार-मोतीचूर-रायवाला खंड के दोहरीकरण को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि रायवाला से देहरादून तक दोहरीकरण के लिए सर्वे कराया जाएगा। मुख्य सचिव ने वर्ष 2033 के कुंभ मेले को देखते हुए इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की आवश्यकता बताई। इसके अलावा मेरठ-ऋषिकेश आरआरटीएस कॉरिडोर, रायवाला में वायाडक्ट निर्माण, मोटरेबल एस्केप टनल तथा आगामी कुंभ के लिए दीर्घकालिक रेलवे योजना पर भी चर्चा हुई। बैठक में देहरादून रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और हर्रावाला स्टेशन के भावी विकास कार्यों की जानकारी भी साझा की गई।



